Wednesday, July 24, 2024
spot_img
HomeUncategorizedआज ही भारत ने पहली बार जीता था क्रिकेट वर्ल्ड कप, इंदौरी...

आज ही भारत ने पहली बार जीता था क्रिकेट वर्ल्ड कप, इंदौरी ने चुनी थी टीम

1983 में हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में कपिल देव की टीम ने 25 जून के दिन फाइनल मैच में वेस्टइंडीज को हराते हुए ट्रॉफी जीत ली थी। इस टीम के चयन में इंदौर के चंदू सरवटे का अहम योगदान था। शुरुआती मैच में भारत के वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद किसी को नहीं थी, लेकिन सरवटे को अपनी टीम पर पूरा यकीन था।

भारतीय टीम क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप की विश्व चैंपियन बनने के लिए कैरेबियाई धरती पर मुकाबला कर रही है। भारतीय खिलाड़ी जब भी क्रिकेट मैदान पर उतरते हैं तो वर्ष 1983 की खिताबी जीत हमेशा प्रेरणास्रोत होती है।

भारत आज भले ही क्रिकेट की महाशक्ति हो, लेकिन सन 1983 में हालात अलग थे। न बीसीसीआई के पास पैसा था, न ही अब जैसा रुतबा। विश्व कप अंग्रेजों के घर में था, जो आजाद होने के बाद भी भारतीयों को प्रति कुछ अलग ही नजरिया रखते थे।

मगर जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा, भारतीय टीम चैंपियन नजर आने लगी। फिर आया 25 जून 1983 का वह दिन, जब भारत ने तब की अपराजेय मानी जाने वाली वेस्टइंडीज को हराते हुए दुनिया को मानो सन्न कर दिया।

भारतीय खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम की ओर दौड़ रहे थे और लॉर्ड्स की बालकनी में एक इंदौरी तिरंगा लहरा रहा था। यह भी कम रोचक नहीं है कि विश्व विजेता टीम को चुनने वाला भी एक इंदौरी ही था।

बीसीसीआई के पूर्व सचिव संजय जगदाले बताते हैं, भारतीय क्रिकेट को 1983 की खिताबी जीत ने बिल्कुल बदल दिया। तब इंदौर के चंदू सरवटे भारतीय टीम के चयनकर्ता थे। सरवटे खुद की प्रथमश्रेणी क्रिकेटर रहे थे और पेशेवर जीवन में प्रदेश के ख्यात फ्रिंगर प्रिंट विशेषज्ञ भी थे।

स्वभावगत छोटी-छोटी चीजों पर उनकी नजर होती थी। विश्व कप के हालात के अनुसार खिलाड़ियों के चयन में उनका अहम योगदान रहा। विश्व कप से पहले किसी को भारतीय टीम के चैंपियन बनने की उम्मीद कम थी, लेकिन सरवटे को अपनी टीम पर यकीन था।

उल्लेखनीय है कि सरवटे मप्र टीम के लंबे समय तक कप्तान रहे, साथ ही मप्र क्रिकेट संगठन के सचिव भी रहे। वे दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर और कुशल बल्लेबाज थे। विश्व कप के समय बीसीसीआई के सचिव इंदौर के अनंतवागेश कनमड़ीकर थे।

विश्व कप के फाइनल के दौरान टीम का हौसला बढ़ाने जज साहब के नाम से लोकप्रिय कनमड़ीकर लॉर्ड्स में मौजूद थे। किसी आम प्रशंसक की तरह तिरंगा लेकर तैयार थे। जैसे ही टीम जीती उन्होंने लॉर्ड्स की बालकनी से तिरंगा लहराना शुरू किया।

यह दृश्य तब बहुत लोकप्रिय हुआ था। कनमड़ीकर के पोते प्रसून बताते हैं मैच के दौरान मेरे पिता और एमपीसीए के पूर्व सचिव मिलिंद भी स्टेडियम में मौजूद थे। मेरी दादी ने उन्हें अपना टिकट दिया था।

मगर मुख्य पवैलियन के गेट पर उन्हें इसलिए रोक दिया गया क्योंकि उन्होंने टाई नहीं पहनी थी। टीम स्टेडियम के पास वेस्टमोरलैंड होटल में रुकी थी।

यहां रात को जश्न का माहौल था, जो पूरी रात जारी रहा। मेरे पिता और रवि शास्त्री युवा थे और वे ही मेरे पिता को पार्टी में लेकर गए। तब हर जगह दीपावली मन रही थी।

SourceNaidunia
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments