इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी मामले की जांच रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में जल और सीवर लाइनों की तकनीकी खामियां दर्ज हैं।
पुरानी पाइपलाइन बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट के अनुसार, सीवर लाइन 1990 से 1995 के बीच बिछाई गई थी। पेयजल पाइपलाइन 1999 से 2004 के बीच डाली गई थी। कई जगह दोनों लाइनों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं थी।
जांच में लीकेज और पाइपलाइन की खराब स्थिति से संक्रमण का जोखिम सामने आया। contaminated water testing में पानी में E. coli और Total Coliform जैसे बैक्टीरिया मिले।
इंदौर नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल
रिपोर्ट में पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में लंबी प्रशासनिक देरी का उल्लेख है। पुरानी लाइन बदलने का काम तय समय से काफी देर बाद पूरा हुआ।
इंदौर नगर निगम की निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई और रिकॉर्ड व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों की भूमिका की अलग-अलग समीक्षा की गई।
बीमारी और मौतों का मामला
भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 से दूषित पानी के कारण लोग बीमार हुए थे। जांच रिपोर्ट में 22 मौतों को पानी से फैली बीमारी से संभावित रूप से जोड़ा गया है।
स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या 36 बताई जाती रही है। इस मामले में रिपोर्ट के आंकड़ों और स्थानीय दावों में अंतर मौजूद है।
मुआवजे की सिफारिश
जांच आयोग ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए भी आर्थिक सहायता की अनुशंसा की गई है।
आगे क्या होगा?
रिपोर्ट में जल आपूर्ति व्यवस्था में संस्थागत सुधार की जरूरत बताई गई है। भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए स्वतंत्र जल आपूर्ति प्राधिकरण बनाने की सिफारिश भी हुई है।
FAQs
1. भागीरथपुरा में दूषित पानी मामला कब सामने आया?
दिसंबर 2025 में क्षेत्र में लोग दूषित पानी से बीमार होने लगे थे।
2. पानी में कौन से बैक्टीरिया मिले?
जांच में E. coli और Total Coliform पाए गए थे।
3. रिपोर्ट में क्या मुख्य खामी बताई गई?
सीवर और पेयजल पाइपलाइनों की स्थिति और उनके बीच पर्याप्त दूरी नहीं होना प्रमुख बिंदु रहे।
4. आयोग ने कितना मुआवजा सुझाया?
मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये देने की सिफारिश की गई है।