इंदौर के व्यस्त देवास नाका चौराहे पर बन रहे 6-लेन फ्लाईओवर के निर्माण के कारण ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। निर्माण क्षेत्र में काम आगे बढ़ने के साथ वाहनों की आवाजाही को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा जा रहा है। इसका सीधा असर देवास, मांगलिया, सांवेर रोड और शहर के पूर्वी हिस्से की ओर आने-जाने वाले वाहन चालकों पर पड़ रहा है।
देवास नाका पर फ्लाईओवर का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की परियोजना का हिस्सा है। प्रशासन का उद्देश्य व्यस्त चौराहे पर ट्रैफिक दबाव कम करना और भविष्य में वाहनों को सिग्नल से गुजरने की जरूरत कम करना है। इंदौर जिला प्रशासन ने निर्माण के दौरान यातायात और पैदल यात्रियों की सुविधा पर भी निगरानी के निर्देश दिए हैं।
देवास नाका पर क्यों बदला ट्रैफिक रूट?
देवास नाका इंदौर के प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल है। यहां से देवास, मांगलिया, बायपास, सांवेर और शहर के अलग-अलग हिस्सों की ओर बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं।
फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान सड़क का एक हिस्सा निर्माण गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में सामान्य यातायात को उसी क्षमता से चलाना मुश्किल होता है। इसी वजह से चरणबद्ध तरीके से ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर भेजा जा रहा है।
पहले भी निर्माण के दौरान सत्यसाई चौराहा, बापट चौराहा, निपानिया और मांगलिया की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट इस्तेमाल किए गए थे। इनमें न्यू लोहा मंडी और आसपास के मार्ग शामिल रहे हैं।
पुराना अनुभव भी बना वजह
देवास नाका क्षेत्र में निर्माण के कारण ट्रैफिक समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। 2025 में इंदौर-देवास मार्ग पर निर्माण गतिविधियों के दौरान लंबा जाम लगा था। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 8 किलोमीटर क्षेत्र में हजारों वाहन फंस गए थे और जाम करीब 32 घंटे तक चला था। इस दौरान तीन लोगों की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
इस घटना ने निर्माण क्षेत्रों में ट्रैफिक मैनेजमेंट और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता उपलब्ध रखने की जरूरत को सामने रखा।
देवास नाका फ्लाईओवर की क्या स्थिति है?
देवास नाका पर 6-लेन फ्लाईओवर के निर्माण की आधिकारिक प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। इंदौर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जुलाई 2024 में इस परियोजना से संबंधित अधिसूचना भी दर्ज है।
परियोजना के दौरान रास्ते में आने वाले अतिक्रमण भी हटाए गए। जून 2026 में जिला प्रशासन, नगर निगम और MPRDC की संयुक्त कार्रवाई में निर्माण में बाधा बन रहे ढांचों को हटाया गया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 30 से 35 दुकानों से जुड़े अतिक्रमण निर्माण क्षेत्र में बाधा बन रहे थे।
इस कार्रवाई के बाद निर्माण एजेंसी के लिए काम का रास्ता साफ हुआ।
प्रशासन ने क्या निर्देश दिए?
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने शहर में निर्माणाधीन फ्लाईओवरों का निरीक्षण करते हुए देवास नाका समेत प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की थी।
अधिकारियों को निर्माण कार्य तेज करने के साथ यह भी निर्देश दिए गए कि बारिश के दौरान निर्माण स्थलों के आसपास जलभराव और अनावश्यक ट्रैफिक जाम नहीं होना चाहिए। पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रास्ते बनाने और जरूरत के अनुसार सड़क की मरम्मत करने को भी कहा गया।
यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि निर्माण क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई कम होने पर थोड़ी सी अव्यवस्था भी लंबा जाम पैदा कर सकती है।
वाहन चालकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
देवास नाका से गुजरने वाले वाहन चालकों को फिलहाल निर्माण क्षेत्र में लगे संकेतक, बैरिकेड और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
विशेष रूप से पीक ऑवर में देवास नाका, मांगलिया, निपानिया और आसपास के संपर्क मार्गों पर अतिरिक्त समय लग सकता है। लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालक निकलने से पहले अपने नेविगेशन ऐप पर ट्रैफिक स्थिति भी देख सकते हैं।
पुराने डायवर्जन प्लान में सत्यसाई और बापट चौराहे से मांगलिया जाने वाले वाहनों को न्यू लोहा मंडी की तरफ भेजा गया था। हालांकि, वर्तमान डायवर्जन में कौन-सा मार्ग किस दिशा के लिए लागू है, इसकी अंतिम जानकारी मौके पर लगे ट्रैफिक संकेतों और पुलिस निर्देशों के अनुसार ही माननी चाहिए।
क्या इससे ट्रैफिक की समस्या खत्म होगी?
फ्लाईओवर पूरा होने के बाद देवास नाका पर मुख्य क्रॉसिंग ट्रैफिक को ऊपर से निकालने की सुविधा मिलेगी। इससे सिग्नल पर रुकने वाले वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन निर्माण पूरा होने तक वाहन चालकों को अस्थायी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर तब, जब एक ही समय में बारिश, सड़क की मरम्मत और निर्माण गतिविधियां चल रही हों।
शहर में अन्य फ्लाईओवर परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान भी प्रशासन ने निर्माण स्थलों पर ट्रैफिक जाम और जलभराव रोकने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
जनता पर क्या असर पड़ेगा?
देवास नाका से रोजाना गुजरने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा असर यात्रा समय पर पड़ सकता है। वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से कुछ सड़कों पर अतिरिक्त जाम बन सकता है।
दूसरी तरफ, निर्माण पूरा होने के बाद यह परियोजना क्षेत्र के ट्रैफिक फ्लो को बेहतर करने में मदद कर सकती है। इसका फायदा देवास रोड, मांगलिया और आसपास के इलाकों से नियमित यात्रा करने वाले लोगों को मिल सकता है।
इसलिए फिलहाल वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी बात है कि वे निर्माण क्षेत्र में जल्दबाजी न करें और अचानक बदले मार्ग पर बैरिकेड या डायवर्जन संकेतों को नजरअंदाज न करें।
Important Facts
- देवास नाका पर 6-लेन फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है।
- परियोजना MPRDC से जुड़ी है।
- निर्माण के कारण चरणबद्ध तरीके से ट्रैफिक डायवर्जन किया जा रहा है।
- पहले भी न्यू लोहा मंडी और आसपास के मार्गों का वैकल्पिक रूट के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
- जून 2026 में निर्माण में बाधा बन रहे अतिक्रमण हटाए गए।
- प्रशासन ने निर्माण स्थल पर जलभराव और जाम रोकने के निर्देश दिए हैं।
- पुराने निर्माण चरण में इंदौर-देवास मार्ग पर लंबा जाम भी सामने आया था।
FAQ
Q1. देवास नाका पर ट्रैफिक डायवर्जन क्यों किया गया है?
देवास नाका पर 6-लेन फ्लाईओवर का निर्माण चल रहा है। निर्माण क्षेत्र में सुरक्षित काम के लिए यातायात को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है।
Q2. देवास नाका फ्लाईओवर किस विभाग की परियोजना है?
यह परियोजना मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी MPRDC से जुड़ी है।
Q3. किन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है?
देवास नाका से देवास, मांगलिया, सांवेर रोड और आसपास के क्षेत्रों की ओर रोजाना यात्रा करने वाले वाहन चालकों को अतिरिक्त यात्रा समय लग सकता है।
Q4. क्या पहले भी यहां ट्रैफिक डायवर्जन हुआ है?
हां। फ्लाईओवर निर्माण के अलग-अलग चरणों में वैकल्पिक रूट लागू किए गए हैं। इनमें न्यू लोहा मंडी की ओर जाने वाला मार्ग भी शामिल रहा है।
Q5. क्या फ्लाईओवर बनने के बाद जाम कम होगा?
फ्लाईओवर का उद्देश्य व्यस्त चौराहे पर ट्रैफिक फ्लो बेहतर करना है। इसके पूरा होने के बाद सिग्नल पर रुकने वाले यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
Q6. वाहन चालक अभी किस रूट का इस्तेमाल करें?
वाहन चालकों को वर्तमान में सड़क पर लगाए गए डायवर्जन बोर्ड, बैरिकेड और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों के अनुसार ही मार्ग चुनना चाहिए। पुराने डायवर्जन रूट को वर्तमान व्यवस्था मानना सही नहीं होगा।