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इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, कचरा गाड़ियों का शोर 25% कम करने के निर्देश

इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों से निकलने वाली आवाज 25 प्रतिशत कम करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से शहर में तेज आवाज और लाउडस्पीकर से जुड़ी समस्याओं पर नियंत्रण की उम्मीद है।

ई-इंदौर डेस्क 27 Oct 2026 29 बार देखा गया Indore
इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, कचरा गाड़ियों का शोर 25% कम करने के निर्देश

इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, कचरा गाड़ियों का शोर 25% कम करने के निर्देश  |  ई-इंदौर फोटो

high court indore: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को ध्वनि प्रदूषण पर महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत ने नगर निगम को कचरा गाड़ियों का शोर नियंत्रित करने और पुलिस को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।

न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जयकुमार पिल्लई की पीठ ने अमिताभ उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने प्रशासन से तीन सप्ताह में आदेश के पालन की रिपोर्ट मांगी।

कचरा गाड़ियों की आवाज पर लगेगी लगाम

अदालत ने indore nagar nigam को कचरा संग्रहण वाहनों के लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित सीमा में रखने को कहा। ऐसा संभव नहीं होने पर आवाज कम से कम 25 प्रतिशत घटानी होगी।

नगर निगम की गाड़ियों पर बजने वाले स्वच्छता गीत से होने वाले शोर पर भी सवाल उठे। अदालत ने माना कि नागरिकों को वाहन आने की सूचना देना जरूरी है। हालांकि, इसके लिए अत्यधिक तेज आवाज उचित नहीं है।

हर थाने में होगी शोर मापने की व्यवस्था

high court mp ने शहर के प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि मापक यंत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इससे पुलिस शिकायत मिलने पर मौके पर आवाज का स्तर जांच सकेगी।

सुनवाई में खजराना एसीपी आशीष पटेल उपकरण लेकर उपस्थित हुए। अदालत को बताया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर कार्रवाई के लिए इसका इस्तेमाल अब तक नहीं हुआ था।

शिकायत दर्ज कराना होगा आसान

noise pollution complaint के लिए संबंधित पुलिस थानों के संपर्क नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। अदालत ने इन्हें समाचार पत्रों और इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर प्रकाशित करने को कहा।

प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवक नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए। ये स्वयंसेवक तेज आवाज की सूचना पुलिस को देंगे और जरूरत पड़ने पर वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे।

साइलेंस जोन की सूची होगी सार्वजनिक

अदालत ने अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शोर नियंत्रण पर जोर दिया। राज्य सरकार को साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करने के निर्देश दिए गए।

पहले दिए गए आदेश का पर्याप्त पालन नहीं होने पर पीठ ने असंतोष जताया। प्रशासन को अन्य संवेदनशील स्थानों के लिए नागरिकों से सुझाव भी लेने होंगे।

त्योहारों के शोर पर भी सख्ती

सुनवाई में नवरात्रि और दशहरे के दौरान अत्यधिक शोर का मुद्दा उठा। अदालत ने पुलिस से प्राप्त शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा।

तेज लाउडस्पीकर, वाहनों और सार्वजनिक आयोजनों से निकलने वाली आवाज प्रमुख noise pollution sources हो सकती हैं। noise pollution prevention के लिए निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन जरूरी है।

अब आगे क्या होगा?

प्रशासन को तीन सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित है।

इस दौरान कचरा गाड़ियों की आवाज, पुलिस उपकरणों और शिकायत व्यवस्था पर कार्रवाई की समीक्षा होगी। आदेश का असर प्रशासन द्वारा उठाए गए वास्तविक कदमों पर निर्भर करेगा।

FAQ

1. इंदौर हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर क्या आदेश दिया है?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम की कचरा गाड़ियों का शोर कम करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस को ध्वनि प्रदूषण की निगरानी बढ़ाने को भी कहा है।

2. इंदौर में कचरा गाड़ियों की आवाज कितनी कम होगी?

हाईकोर्ट ने कचरा संग्रहण वाहनों की आवाज निर्धारित सीमा में रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसा संभव नहीं होने पर शोर कम से कम 25 प्रतिशत घटाना होगा।

3. क्या इंदौर के सभी पुलिस थानों में साउंड मीटर लगाए जाएंगे?

हां, हाईकोर्ट ने प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि मापक यंत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पुलिस आवाज का स्तर जांच सकेगी।

4. इंदौर में ध्वनि प्रदूषण की शिकायत कैसे करें?

नागरिक संबंधित पुलिस थाने में noise pollution complaint दर्ज करा सकते हैं। हाईकोर्ट ने शिकायत के लिए पुलिस थानों के संपर्क नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं।

5. ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए हाईकोर्ट ने और क्या निर्देश दिए?

अदालत ने साइलेंस जोन की सूची सार्वजनिक करने और प्रत्येक वार्ड में दो स्वयंसेवक नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। ये स्वयंसेवक शोर की शिकायत पुलिस तक पहुंचाने में मदद करेंगे।


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