मध्य प्रदेश। डिंडोरी और अमरकंटक के साल जंगलों में फैले एक खतरनाक कीट ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। साल हार्टवुड बोरर नाम का यह कीट पेड़ के तने के अंदर जाकर लकड़ी को खोखला कर सकता है। संक्रमण को दूसरे स्वस्थ पेड़ों तक फैलने से रोकने के लिए प्रभावित पेड़ों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
सितंबर 2026 में केंद्र से प्रभावित साल पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने के बाद डिंडोरी में 1,46,784 पेड़ों और अनूपपुर जिले के अमरकंटक क्षेत्र में 9,535 पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई। दोनों आंकड़ों को मिलाकर संख्या 1,56,319 पेड़ों तक पहुंचती है।
साल बोरर कीट कितना खतरनाक है?
इस कीट का वैज्ञानिक नाम Hoplocerambyx spinicornis है। यह एक प्रकार का लॉन्गहॉर्न बीटल है, जो साल के पेड़ों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कीट पेड़ के तने में प्रवेश कर अंदर की लकड़ी को नुकसान पहुंचाता है। ज्यादा संक्रमण होने पर पेड़ कमजोर होकर सूख सकता है। अधिकारियों के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। भारत में साल बोरर के कई बड़े प्रकोप पहले भी दर्ज किए जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में करीब तीन दशक पहले भी बड़े स्तर पर इसका प्रकोप देखा गया था। अब 2026 में इसके दोबारा बड़े पैमाने पर फैलने से प्रभावित जंगलों में नियंत्रण अभियान तेज किया गया है।
1.56 लाख पेड़ों की कटाई का उद्देश्य क्या है?
यह कार्रवाई सामान्य पेड़ कटाई अभियान नहीं है। वन विभाग का उद्देश्य संक्रमित पेड़ों को हटाकर कीट के प्रसार को रोकना है।
संक्रमित पेड़ों को जंगल में खड़ा छोड़ने से उनमें मौजूद कीट आगे दूसरे पेड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए प्रभावित पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके साथ ही कीटों की संख्या कम करने के लिए अलग अभियान भी चल रहा है।
ग्रामीणों को कीड़े पकड़ने के ₹2 क्यों मिल रहे?
इस अभियान में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हैं। वन विभाग की ओर से पकड़े गए साल बोरर के लिए ₹2 प्रति कीड़ा भुगतान किया जा रहा है।
ग्रामीण जंगल में लगाए गए ट्रैप ट्री और प्रभावित पेड़ों के आसपास से कीटों को इकट्ठा करके निर्धारित संग्रह केंद्रों पर जमा करते हैं। इससे एक तरफ कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिलती है और दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस सीजन में 19,25,118 से अधिक कीड़े जमा किए जा चुके हैं। ₹2 प्रति कीड़े के हिसाब से इसका भुगतान करीब ₹38.5 लाख बनता है।
ट्रैप ट्री से कैसे रोका जा रहा संक्रमण?
वन विभाग ट्रैप ट्री तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसके तहत कुछ पेड़ों को नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है ताकि वयस्क कीट उनकी ओर आकर्षित हों।
इसके बाद इन पेड़ों और आसपास जमा हुए कीटों को हटाया जाता है। इसका उद्देश्य कीटों को स्वस्थ साल पेड़ों तक पहुंचने और प्रजनन करने से पहले नियंत्रित करना है।
डिंडोरी के जंगल क्यों महत्वपूर्ण हैं?
साल मध्य भारत के जंगलों की प्रमुख वृक्ष प्रजातियों में शामिल है। डिंडोरी और आसपास का क्षेत्र साल के बड़े वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है।
साल के पेड़ों से स्थानीय समुदायों को भी आर्थिक लाभ मिलता है। इनके बीज, पत्तियां और राल जैसे वन उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। इसलिए कीट का प्रकोप केवल पेड़ों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इससे जंगल और स्थानीय आजीविका दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
वन विभाग प्रभावित पेड़ों को हटाने के साथ कीट संग्रह और नियंत्रण अभियान जारी रखेगा। डिंडोरी में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अमरकंटक क्षेत्र में भी संक्रमित पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया इसी नियंत्रण रणनीति का हिस्सा है।
वन अधिकारियों के अनुसार लक्ष्य संक्रमित पेड़ों को हटाकर स्वस्थ साल जंगल को बचाना और कीट के आगे फैलाव को रोकना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
प्रभावित क्षेत्र: डिंडोरी और अमरकंटक क्षेत्र
डिंडोरी में स्वीकृत कटाई: 1,46,784 साल पेड़
अमरकंटक में: 9,535 साल पेड़
कुल: 1,56,319 पेड़
मुख्य खतरा: साल हार्टवुड बोरर
कीट पकड़ने पर भुगतान: ₹2 प्रति कीड़ा
अब तक संग्रह: 19.25 लाख से अधिक कीट
मुख्य नियंत्रण तरीका: ट्रैप ट्री और संक्रमित पेड़ों की कटाई
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मध्य प्रदेश में इतने साल के पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं?
साल हार्टवुड बोरर के गंभीर संक्रमण को नियंत्रित करने और इसे स्वस्थ पेड़ों तक फैलने से रोकने के लिए संक्रमित पेड़ों को हटाया जा रहा है।
2. कुल कितने पेड़ काटने की मंजूरी मिली है?
डिंडोरी के 1,46,784 और अमरकंटक क्षेत्र के 9,535 पेड़ों को मिलाकर कुल 1,56,319 साल पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है।
3. ग्रामीणों को कीड़े पकड़ने के पैसे क्यों दिए जा रहे हैं?
कीटों की संख्या कम करने के लिए ग्रामीणों को उन्हें इकट्ठा कर निर्धारित केंद्रों पर जमा करने के बदले ₹2 प्रति कीड़ा दिया जा रहा है।
4. क्या साल बोरर से स्वस्थ पेड़ों को भी खतरा है?
हां, बड़े प्रकोप की स्थिति में यह कीट साल के पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए संक्रमित पेड़ों को हटाना और कीटों की संख्या नियंत्रित करना अभियान का हिस्सा है।
समापन
मध्य प्रदेश में 1.56 लाख साल पेड़ों की कटाई पहली नजर में बड़ी पर्यावरणीय कार्रवाई लग सकती है, लेकिन मौजूदा अभियान का उद्देश्य संक्रमित पेड़ों को हटाकर व्यापक साल वन को बचाना है। इसके साथ कीटों को पकड़ने में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी भी कराई जा रही है। आने वाले महीनों में इस नियंत्रण अभियान का असर यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि साल बोरर का प्रकोप कितनी तेजी से नियंत्रित होता है।