सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में चल रहा आंदोलन 16 अक्टूबर 2026 को स्थगित हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे देने और कार्रवाई की जांच कराने का आश्वासन दिया।
जमीन और मुआवजे को लेकर उठा विवाद
भेरूंदा तहसील के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई से आदिवासी परिवार नाराज थे। प्रदर्शनकारियों ने मकानों, फसलों और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचने की शिकायत की थी।
इस मामले में आदिवासी समुदाय के लोग भोपाल की ओर पैदल मार्च कर रहे थे। उनकी मांगों में जमीन का अधिकार, नुकसान का मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शामिल थी।
सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने भोपाल कूच स्थगित कर दिया। विधायक रामाकांत भार्गव ने भी घर वापसी का ऐलान किया। अब प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे देने और वन विभाग की कार्रवाई की जांच पर नजर रहेगी।
इस मामले में संबंधित mp government department की जांच और आगे की कार्रवाई अहम होगी। प्रभावित परिवारों को राहत कब मिलेगी, यह आगे के सरकारी फैसलों पर निर्भर करेगा।
FAQs
1. सीहोर में आदिवासी आंदोलन क्यों हुआ?
कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने और फसलों को नुकसान पहुंचने के विरोध में आंदोलन हुआ।
2. आंदोलन कब स्थगित हुआ?
आंदोलन 16 अक्टूबर 2026 को स्थगित हुआ।
3. मुख्यमंत्री ने क्या आश्वासन दिया?
मुख्यमंत्री ने जमीन के पट्टे देने और वन विभाग की कार्रवाई की जांच कराने का भरोसा दिया।
4. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या थीं?
उनकी मांगों में जमीन का अधिकार, नुकसान का मुआवजा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल थी।
5. क्या प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे मिल गए हैं?
उपलब्ध रिपोर्टों में पट्टे देने का आश्वासन दिया गया है। पट्टे वास्तव में जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।