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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच जानिए भारत के 7 बड़े नैतिक इस्तीफे

NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। जानिए भारत के उन नेताओं के बारे में जिन्होंने विभागीय घटनाओं पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया।

ई-इंदौर डेस्क 23 Jul 2026 19 बार देखा गया Politics
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच जानिए भारत के 7 बड़े नैतिक इस्तीफे

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच जानिए भारत के 7 बड़े नैतिक इस्तीफे  |  ई-इंदौर फोटो

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग NEET विवाद के बाद लगातार तेज हो रही है। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने अब तक उनके इस्तीफे के संकेत नहीं दिए हैं। इस बीच भारतीय राजनीति के कई ऐसे उदाहरण चर्चा में हैं, जब मंत्रियों ने विभागीय घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया।

भारत के चर्चित नैतिक इस्तीफे

1. लाल बहादुर शास्त्री

1956 में तमिलनाडु के अरियालूर रेल हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। उस समय लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे। उन्होंने व्यक्तिगत गलती न होने के बावजूद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।

2. टी. टी. कृष्णमाचारी

मुंधड़ा वित्तीय घोटाले के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी ने पद छोड़ दिया। उन पर सीधे भ्रष्टाचार का आरोप नहीं था, लेकिन प्रशासनिक जवाबदेही स्वीकार की गई।

3. वी. के. कृष्ण मेनन

1962 के भारत-चीन युद्ध में सैन्य तैयारियों पर सवाल उठे। इसके बाद रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन ने राजनीतिक दबाव के बीच इस्तीफा दिया।

4. नीतीश कुमार

1999 के गैसल रेल हादसे में 280 लोगों की मौत हुई थी। उस समय रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार ने नैतिक आधार पर पद छोड़ दिया।

5. शिवराज पाटिल

26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे। तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।

6. विलासराव देशमुख

26/11 हमलों के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने भी पद छोड़ दिया। उनके इस्तीफे को राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया।

7. ममता बनर्जी और सुरेश प्रभु

रेल दुर्घटनाओं के बाद ममता बनर्जी और सुरेश प्रभु ने भी इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि उस समय प्रधानमंत्री ने उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं किए।

धर्मेंद्र प्रधान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों के कारण हो रही है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा मंत्रालय को जवाबदेही तय करनी चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि मंत्री को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं माना जा सकता और फिलहाल उन्हें हटाने की कोई योजना नहीं है।

फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान अपने पद पर बने हुए हैं। संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर बहस जारी है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और विपक्ष की रणनीति इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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