इंदौर लोड हो रहा है... 876,519 विज़िटर्स
ई-इंदौर लोगो
होम / Indore / इंदौर नगर निगम का बड़ा फैसला, अब पीली पट्टी वाले टैंकरों …
Indore

इंदौर नगर निगम का बड़ा फैसला, अब पीली पट्टी वाले टैंकरों से मिलेगा ट्रीटेड पानी

इंदौर नगर निगम ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए ट्रीटेड पानी के टैंकरों पर पीली पट्टी लगाने की पहल की है। इससे साफ पानी और उपचारित पानी की पहचान आसान होगी। नगर निगम का उद्देश्य गैर-पीने योग्य कार्यों में ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल को बढ़ाना और पेयजल की बचत करना है।

ई-इंदौर डेस्क 03 Nov 2026 19 बार देखा गया Indore
इंदौर नगर निगम का बड़ा फैसला, अब पीली पट्टी वाले टैंकरों से मिलेगा ट्रीटेड पानी

इंदौर नगर निगम का बड़ा फैसला, अब पीली पट्टी वाले टैंकरों से मिलेगा ट्रीटेड पानी  |  ई-इंदौर फोटो

इंदौर, 3 नवंबर 2026। indore local news: इंदौर नगर निगम ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब ट्रीटेड पानी ले जाने वाले टैंकरों पर पीली पट्टी लगाई जाएगी। इससे नागरिक पीने योग्य पानी और उपचारित पानी के टैंकरों में अंतर पहचान सकेंगे।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टैंकरों में लीकेज रोकने के निर्देश भी दिए हैं। संबंधित एजेंसियों को खराबी सुधारने के लिए सात दिन का समय मिलेगा। तय अवधि में मरम्मत नहीं होने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

पीली पट्टी से होगी पानी की पहचान

नगर निगम सड़क डिवाइडर, सार्वजनिक उद्यानों और पौधों की सिंचाई में ट्रीटेड पानी इस्तेमाल करता है। अब इस पानी को ले जाने वाले टैंकरों की अलग पहचान होगी।

टैंकरों पर पीली पट्टी लगने से नागरिक समझ सकेंगे कि इनमें पीने का पानी नहीं है। निगम का उद्देश्य पानी के उपयोग को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना है।

महापौर ने बताया कि कई बार सड़क पर पानी डालते टैंकरों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। लोग इसे पीने के पानी की बर्बादी समझ लेते हैं।

नई पहचान व्यवस्था से ऐसी गलतफहमियां कम होने की उम्मीद है। हालांकि, पीली पट्टी लगाने से टैंकरों का रिसाव अपने आप नहीं रुकेगा।

सात दिन में ठीक करना होगा लीकेज

नगर निगम ने पानी टपकाने वाले टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की है। निगम के लिए काम करने वाली निजी एजेंसियों को सात दिन की मोहलत दी गई है।

इस दौरान एजेंसियों को टैंकरों की जांच और आवश्यक मरम्मत करानी होगी। समय सीमा समाप्त होने के बाद खराब टैंकर मिलने पर कार्रवाई होगी।

नगर निगम जुर्माना भी लगा सकता है। हालांकि, जुर्माने की निश्चित राशि की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

यह नियम केवल निजी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा। नगर निगम के अपने टैंकर भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।

निगम के टैंकरों की भी होगी जांच

महापौर ने वर्कशॉप विभाग को सभी निगम टैंकरों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। विभाग को खराब टैंकरों की मरम्मत करानी होगी।

किसी टैंकर की टंकी, पाइप या वाल्व से पानी रिसने पर उसे ठीक किया जाएगा। इससे पानी की अनावश्यक बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है।

नगर निगम का ध्यान अब टैंकरों की पहचान और तकनीकी स्थिति दोनों पर रहेगा। इससे पानी के परिवहन और वितरण की निगरानी बेहतर हो सकती है।

गर्मियों से पहले आएंगे 30 से ज्यादा नए टैंकर

इंदौर नगर निगम आगामी गर्मी के मौसम के लिए जलापूर्ति की तैयारी कर रहा है। इसके तहत 30 से अधिक नए पानी के टैंकर खरीदने की योजना है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, गर्मियों में जरूरत वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना नगर निगम की प्राथमिकता है।

नए टैंकर मिलने से नगर निगम के पास जल वितरण के अतिरिक्त साधन उपलब्ध होंगे। इससे जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी।

हालांकि, टैंकर खरीदने की अंतिम तारीख और कुल बजट की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ट्रीटेड पानी क्या होता है?

ट्रीटेड पानी वह जल है, जिसे निर्धारित प्रक्रिया से उपचारित किया जाता है। इसके बाद गुणवत्ता के अनुसार इसका उपयोग अलग-अलग कार्यों में किया जा सकता है।

इंदौर नगर निगम इस पानी का इस्तेमाल सड़क डिवाइडर की सफाई और बगीचों की सिंचाई में करता है।

ऐसे कार्यों में उपचारित पानी इस्तेमाल करने से पीने योग्य पानी की मांग कम की जा सकती है।

हालांकि, हर प्रकार का ट्रीटेड पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं होता। पीने योग्य बनाने के लिए अलग गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी है।

सोशल मीडिया पर क्यों उठे सवाल?

महापौर ने बताया कि टैंकरों से सड़क पर पानी डालने के वीडियो पहले भी सामने आए हैं। इन वीडियो के बाद पानी की बर्बादी को लेकर सवाल उठे थे।

एक पुराने मामले में महापौर के निवास के बाहर पानी से सफाई का वीडियो वायरल हुआ था। उस समय सफाई में ट्रीटेड पानी इस्तेमाल होने की बात कही गई थी।

अब नगर निगम चाहता है कि नागरिक मौके पर ही पानी के प्रकार की पहचान कर सकें। पीली पट्टी इसी उद्देश्य से लगाई जाएगी।

इंदौर के नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?

indore city news के तहत यह फैसला शहर की जल संरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसका प्रभाव सार्वजनिक सफाई और बगीचों की सिंचाई में दिखाई दे सकता है।

पीली पट्टी वाले टैंकरों को देखकर नागरिक समझ सकेंगे कि उनमें उपचारित पानी है। इससे पीने के पानी के इस्तेमाल को लेकर भ्रम कम होगा।

टैंकरों की मरम्मत से सड़कों पर अनावश्यक पानी बहने की समस्या भी घट सकती है। हालांकि, वास्तविक सुधार मरम्मत और निगरानी पर निर्भर करेगा।

इस पहल का सीधा उद्देश्य घरेलू पानी की दरें बदलना नहीं है। नगर निगम ने पानी के शुल्क में बदलाव की घोषणा नहीं की है।

जल संरक्षण पर बढ़ेगा ध्यान

इंदौर में जल संरक्षण और जलापूर्ति प्रबंधन नगर निगम की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं। गर्मियों में कुछ क्षेत्रों में पानी की मांग बढ़ सकती है।

ऐसी स्थिति में टैंकरों की उपलब्धता और उनका सही रखरखाव उपयोगी होता है। नगर निगम इसी व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी कर रहा है।

indore recent news में सामने आई इस पहल के बाद टैंकरों पर पहचान चिह्न लगाने का काम महत्वपूर्ण रहेगा।

इसके साथ ही निजी एजेंसियों और निगम के वाहनों की जांच पर भी ध्यान रहेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • फैसला: ट्रीटेड पानी वाले टैंकरों पर पीली पट्टी

  • विभाग: इंदौर नगर निगम

  • उद्देश्य: पानी की पहचान आसान बनाना और बर्बादी रोकना

  • मरम्मत की समय सीमा: सात दिन

  • कार्रवाई: लीकेज नहीं सुधारने पर संभावित जुर्माना

  • नई खरीद: 30 से अधिक टैंकरों की योजना

  • प्रमुख अधिकारी: महापौर पुष्यमित्र भार्गव

आगे क्या होगा?

नगर निगम की एजेंसियों को तय अवधि में टैंकरों की खराबी दूर करनी होगी। इसके बाद संबंधित विभाग वाहनों की स्थिति की जांच कर सकता है।

पीली पट्टी लगाने की प्रक्रिया और नए टैंकरों की खरीद से जुड़े अगले कदमों पर भी नजर रहेगी।

नगर निगम का यह फैसला उपचारित पानी की पहचान और टैंकरों के रखरखाव से जुड़ा है। इसकी सफलता नियमों के पालन और नियमित जांच पर निर्भर करेगी।


पर वापस जाएंIndore