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महाकाल मंदिर में दान व्यवस्था हुई हाईटेक: अब कराटोमीटर से होगी सोना-चांदी की जांच, श्रद्धालुओं को मिलेगी पूरी रिपोर्ट

उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए जाने वाले सोना-चांदी की शुद्धता अब ऑटोमेटेड कराटोमीटर मशीन से जांची जाएगी। जांच श्रद्धालुओं की मौजूदगी में होगी और उन्हें शुद्धता की रिपोर्ट के साथ आधिकारिक रसीद भी दी जाएगी, जिससे दान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

ई-इंदौर डेस्क 20 Jul 2026 31 बार देखा गया Madhya Pradesh
महाकाल मंदिर में दान व्यवस्था हुई हाईटेक: अब कराटोमीटर से होगी सोना-चांदी की जांच, श्रद्धालुओं को मिलेगी पूरी रिपोर्ट

महाकाल मंदिर में दान व्यवस्था हुई हाईटेक: अब कराटोमीटर से होगी सोना-चांदी की जांच, श्रद्धालुओं को मिलेगी पूरी रिपोर्ट  |  ई-इंदौर फोटो

Mahakal Temple Goes High-Tech: Gold and Silver Donations to Be Tested with Karat Meter

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दान प्रक्रिया अब और पारदर्शी बनने जा रही है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने सोना और चांदी के दान की शुद्धता जांचने के लिए ऑटोमेटेड कराटोमीटर मशीन स्थापित की है। अब श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषणों और बहुमूल्य धातुओं की जांच उनके सामने ही होगी और उन्हें जांच रिपोर्ट के साथ रसीद भी दी जाएगी।

अब कैसे होगी सोना-चांदी की जांच?

मंदिर समिति के अनुसार, नई कराटोमीटर मशीन बिना आभूषण को नुकसान पहुंचाए उसकी शुद्धता (कैरट) की जांच करेगी। पहले ऐसी जांच के लिए पारंपरिक प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जिसमें अधिक समय लगता था।

नई मशीन के जरिए कुछ ही मिनटों में यह पता चल सकेगा कि दान में दिया गया सोना या चांदी कितनी शुद्ध है।

श्रद्धालुओं को मिलेगी जांच रिपोर्ट

नई व्यवस्था के तहत जांच पूरी होने के बाद श्रद्धालु को रसीद के साथ शुद्धता की विस्तृत रिपोर्ट भी दी जाएगी। इससे दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और भविष्य में किसी तरह के विवाद की संभावना भी कम होगी।

मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

मंदिर समिति ने क्यों लिया फैसला?

हाल के समय में देश के कई मंदिरों में दान और बहुमूल्य आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे हैं। इसी को देखते हुए महाकाल मंदिर समिति ने आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

इस पहल का उद्देश्य दान में पारदर्शिता लाना, रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना और श्रद्धालुओं को भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

दान का पूरा रिकॉर्ड होगा सुरक्षित

कराटोमीटर से जांच के बाद प्रत्येक दान का डिजिटल और लिखित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे मंदिर समिति के पास जमा होने वाले सोना-चांदी का प्रमाणिक विवरण उपलब्ध रहेगा और भविष्य में ऑडिट प्रक्रिया भी आसान होगी।

अब आगे क्या होगा?

मंदिर समिति ने इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो अन्य बड़े मंदिरों में भी इसी तरह की तकनीक अपनाने पर विचार किया जा सकता है।

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