VPN नियम को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार VPN सेवा प्रदाताओं के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत कंपनियों को भारत में कार्यालय खोलना और कंप्लायंस अधिकारी नियुक्त करना पड़ सकता है।
भारत में मौजूदगी अनिवार्य हो सकती है
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कई VPN सेवाओं का उपयोग प्रतिबंधित वेबसाइटों और ब्लॉक किए गए ऑनलाइन कंटेंट तक पहुंचने के लिए किया जा रहा है। ऐसे मामलों में कार्रवाई आसान बनाने के लिए कंपनियों की भारत में स्थानीय मौजूदगी पर विचार किया जा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक VPN कंपनी को सरकार से समन्वय के लिए एक कंप्लायंस अधिकारी नियुक्त करना पड़ सकता है। यह व्यवस्था सोशल मीडिया कंपनियों पर लागू आईटी नियमों जैसी हो सकती है।
नियम नहीं मानने पर हो सकती है कार्रवाई
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार गैर-अनुपालन की स्थिति में दंडात्मक प्रावधानों पर भी विचार कर रही है। इनमें जुर्माना और स्थानीय अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम नियम अभी तय नहीं हुए हैं।
2022 के नियमों के बाद कई कंपनियों ने हटाए थे सर्वर
साल 2022 में CERT-In के डेटा संग्रह नियम लागू होने के बाद कई प्रमुख VPN कंपनियों ने भारत से अपने फिजिकल सर्वर हटा दिए थे। इसके बावजूद उपयोगकर्ता विदेशी सर्वरों के जरिए VPN सेवाओं का इस्तेमाल करते रहे। इसी कारण सरकार अब व्यापक कानूनी ढांचे पर काम कर रही है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल सरकार ने नए नियमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मसौदे पर विचार जारी है और अंतिम रूप मिलने के बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत में काम करने वाली VPN कंपनियों के लिए अनुपालन की जिम्मेदारियां पहले से अधिक बढ़ सकती हैं।