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सेना को मिलेंगे नए एंटी-ड्रोन रडार, BEL से ₹770 करोड़ का सौदा

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए Improved Low Level Light Weight Radar खरीदने हेतु भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ करीब ₹770 करोड़ का अनुबंध किया है। ये रडार लड़ाकू विमानों के आकार वाले हवाई लक्ष्यों और छोटे ड्रोन का पता लगाने व उन्हें ट्रैक करने में सक्षम हैं। इस सौदे से सेना की कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों पर निगरानी मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

ई-इंदौर डेस्क 22 Oct 2026 19 बार देखा गया Defence
सेना को मिलेंगे नए एंटी-ड्रोन रडार, BEL से ₹770 करोड़ का सौदा

सेना को मिलेंगे नए एंटी-ड्रोन रडार, BEL से ₹770 करोड़ का सौदा  |  ई-इंदौर फोटो

BEL Radar Deal 2026: भारतीय सेना की हवाई निगरानी क्षमता मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ करीब ₹770 करोड़ का अनुबंध किया है। इस समझौते के तहत सेना को Improved Low Level Light Weight Radar (LLLR-I) सिस्टम मिलेंगे। रक्षा मंत्रालय ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

ये रडार लड़ाकू विमानों के आकार वाले लक्ष्यों के साथ मिनी और माइक्रो ड्रोन का भी पता लगा सकते हैं। इनमें हवाई लक्ष्यों को प्राथमिकता देने की क्षमता भी है। इससे कम ऊंचाई पर आने वाले हवाई खतरों की पहचान करने में सेना को मदद मिलेगी।

मुख्य घटना

रक्षा मंत्रालय ने 21 अक्टूबर को BEL के साथ लगभग ₹770 करोड़ का खरीद अनुबंध किया। इस दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह मौजूद रहे। अनुबंध का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए बेहतर कम ऊंचाई वाले हल्के रडार उपलब्ध कराना है।

LLLR-I रडार सिस्टम हवाई लक्ष्यों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। यह लड़ाकू विमानों के आकार वाले लक्ष्यों के अलावा मिनी और माइक्रो ड्रोन को भी ट्रैक कर सकता है। सिस्टम की एक अतिरिक्त क्षमता हवाई लक्ष्यों को प्राथमिकता देना है, जिससे ऑपरेटर संभावित खतरों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

ड्रोन का इस्तेमाल आधुनिक युद्ध में निगरानी और हमलों के लिए बढ़ रहा है। ऐसे में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन का पता लगाने वाली तकनीक सेना की वायु रक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकती है।

पृष्ठभूमि

भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी तकनीक और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। BEL एक सरकारी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो रडार, संचार उपकरण और अन्य रक्षा इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां बनाती है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह खरीद देश में वायु रक्षा प्लेटफॉर्म के स्वदेशीकरण की दिशा में एक कदम है। इससे रक्षा उत्पादन से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को भी काम मिलने की संभावना है।

कम ऊंचाई पर निगरानी करने वाले रडार बड़े हवाई निगरानी नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों और जमीन की बनावट के कारण कुछ जगहों पर कम ऊंचाई से उड़ने वाले लक्ष्यों की निगरानी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हल्के रडार ऐसे क्षेत्रों में तैनाती के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

प्रशासन की कार्रवाई

रक्षा मंत्रालय ने BEL के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करके रडार खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह सौदा सरकार की स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता की नीति से जुड़ा है। मंत्रालय ने कहा कि इससे देश के रक्षा निर्माण तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

इस अनुबंध के तहत रडार की आपूर्ति और सेना में उनके इस्तेमाल से जुड़े विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी उपलब्ध आधिकारिक विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। इसलिए रडार की संख्या, डिलीवरी की अंतिम तारीख या तैनाती के निश्चित स्थान के बारे में अभी कोई दावा नहीं किया जा सकता।

अब आगे क्या होगा

इस सौदे के बाद रडार की आपूर्ति और सेना की निगरानी व्यवस्था में उनके एकीकरण पर ध्यान रहेगा। इन प्रणालियों का वास्तविक लाभ उनकी समय पर उपलब्धता, परीक्षण और परिचालन तैनाती पर निर्भर करेगा।

आगे इन बातों पर नजर रहेगी:

  • BEL रडार की आपूर्ति कब शुरू करती है।

  • सेना में सिस्टम की तैनाती किस चरण में होती है।

  • छोटे ड्रोन और कम ऊंचाई वाले लक्ष्यों का पता लगाने में इनकी भूमिका कैसी रहती है।

  • घरेलू रक्षा कंपनियों और MSME को इस परियोजना से कितना काम मिलता है।

इन चरणों की जानकारी सामने आने पर अनुबंध के क्रियान्वयन और सेना की क्षमताओं पर इसके प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

जनता पर प्रभाव

यह सौदा सीधे तौर पर किसी उपभोक्ता उत्पाद या आम नागरिक की सेवा से जुड़ा नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य सेना की हवाई निगरानी और वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करना है।

स्वदेशी रक्षा उपकरणों की खरीद से भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे अनुबंधों से रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, पुर्जे, तकनीकी सेवाएं और संबंधित आपूर्ति श्रृंखला में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, इस विशेष अनुबंध से कितने रोजगार पैदा होंगे या कितनी कंपनियों को सीधे ऑर्डर मिलेंगे, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • कंपनी: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)

  • अनुबंध की राशि: लगभग ₹770 करोड़

  • अनुबंध की तारीख: 21 अक्टूबर 2026

  • खरीदने वाली संस्था: रक्षा मंत्रालय

  • उपकरण: Improved Low Level Light Weight Radar (LLLR-I)

  • मुख्य क्षमता: लड़ाकू विमानों के आकार वाले लक्ष्य और मिनी/माइक्रो ड्रोन का पता लगाना व ट्रैक करना

  • अतिरिक्त क्षमता: हवाई लक्ष्यों को प्राथमिकता देना

  • प्रमुख उद्देश्य: सेना की कम ऊंचाई वाली हवाई निगरानी मजबूत करना और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देना।

BEL के ₹1,011 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर का क्या मामला है?

BEL को अतिरिक्त रक्षा और अन्य तकनीकी ऑर्डर मिलने की अलग रिपोर्ट भी सामने आई है। 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 13 अक्टूबर के बाद ₹1,011 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर हासिल किए, जिनमें रडार, संचार उपकरण, सोनार, जैमर, अपग्रेड, स्पेयर और सेवाएं शामिल थीं। यह ₹770 करोड़ के भारतीय सेना रडार अनुबंध से अलग आंकड़ा है; इसे उसी एक अनुबंध की राशि नहीं समझना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. BEL Radar Deal 2026 कितने करोड़ रुपये का है?

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए LLLR-I रडार खरीदने हेतु BEL के साथ करीब ₹770 करोड़ का अनुबंध किया है।

2. LLLR-I रडार क्या कर सकता है?

यह लड़ाकू विमानों के आकार वाले हवाई लक्ष्यों और मिनी व माइक्रो ड्रोन का पता लगाने तथा उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है। इसमें हवाई लक्ष्यों को प्राथमिकता देने की क्षमता भी है।

3. इस रडार सौदे से भारतीय सेना को क्या फायदा होगा?

इससे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई लक्ष्यों की निगरानी बेहतर करने और ड्रोन से पैदा होने वाले खतरों का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है।

4. क्या BEL को ₹1,011 करोड़ के ऑर्डर भी मिले हैं?

एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, BEL ने 13 अक्टूबर के बाद ₹1,011 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर हासिल किए। यह राशि ₹770 करोड़ के रडार अनुबंध से अलग है।

समापन

BEL Radar Deal 2026 भारतीय सेना की कम ऊंचाई वाली हवाई निगरानी क्षमता मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ₹770 करोड़ के अनुबंध के तहत मिलने वाले रडार लड़ाकू विमानों के आकार वाले लक्ष्यों और छोटे ड्रोन का पता लगाने में मदद करेंगे। अब रडार की आपूर्ति, परीक्षण और सेना में तैनाती से जुड़ी आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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