105 साल पुरानी परंपरा का आयोजन
डोल ग्यारस के अवसर पर उज्जैन में बैरवा समाज ने 105वां फूलडोल चल समारोह निकाला। बुधवार को किशनपुरा के बड़े मंदिर से शुरू हुआ जुलूस पुरुषोत्तम सागर पर संपन्न हुआ।
समारोह में अखाड़ों ने शौर्य प्रदर्शन किया। धार्मिक झांकियों में खड़े हनुमान, बाल कृष्ण और बाबा महाकाल की भस्म आरती दिखाई गई।
झांकियों में सिंहस्थ की झलक
समारोह में ujjain temple और धार्मिक परंपराओं से जुड़े दृश्य आकर्षण का केंद्र रहे। झांकियों में सिंहस्थ की तैयारियों और शहर के विकास कार्यों को भी दिखाया गया।
29 किलोमीटर लंबे दिव्य घाट, एलिवेटेड ब्रिज और अमृत कलश की प्रतिकृतियां भी शामिल थीं। यह आयोजन ujjain news में धार्मिक और सामाजिक संदेशों के लिए चर्चा में रहा।
सामाजिक संदेश भी दिखे
फूलडोल की झांकियों में नशा मुक्ति और दहेज प्रथा के खिलाफ संदेश दिए गए। सामाजिक भाईचारे और एकता पर भी जोर दिया गया।
समारोह का मार्ग किशनपुरा से टावर चौक, देवास गेट और गोपाल मंदिर होते हुए पुरुषोत्तम सागर तक रहा। सुरक्षा के लिए प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था रही।
FAQ
1. डोल ग्यारस पर उज्जैन में क्या हुआ?
बैरवा समाज का 105वां फूलडोल चल समारोह निकाला गया।
2. समारोह कहां से शुरू हुआ?
जुलूस किशनपुरा स्थित बड़े मंदिर से शुरू हुआ।
3. समारोह में क्या खास रहा?
अखाड़ों के प्रदर्शन, धार्मिक झांकियां और सिंहस्थ की झलक प्रमुख रही।