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झटका! ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती से सरकार को लगेगा 1 लाख करोड़ का बड़ा नुकसान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान होगा. हालांकि, वैश्विक संकट के बीच आम जनता और उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार ने इस वित्तीय भार को खुद संभालने का बड़ा फैसला किया है.

ई-इंदौर डेस्क 29 May 2026 7 बार देखा गया India
झटका! ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती से सरकार को लगेगा 1 लाख करोड़ का बड़ा नुकसान

झटका! ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती से सरकार को लगेगा 1 लाख करोड़ का बड़ा नुकसान  |  ई-इंदौर फोटो

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की है कि पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी कम करने से केंद्र सरकार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा. सरकार ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आम नागरिकों और व्यवसायों को बचाने के लिए यह कदम उठाया है. वित्त मंत्री ने साफ किया कि जनता को राहत देने के लिए सरकार ने इस वित्तीय घाटे को खुद संभालने का फैसला किया.

आम जनता को राहत देने के लिए उठाया कदम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस समारोह में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू उपभोक्ताओं और परिवारों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी. इस बड़े फैसले के कारण सरकार को होने वाले राजस्व घाटे का अनुमान अब सामने आया है.

सरकार के इस कदम से माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स, एयरलाइंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े छोटे-बड़े उद्योगों को सीधी राहत मिली है. वैश्विक ऊर्जा बाजार में पश्चिम एशिया के संकट के कारण अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. ऐसे समय में सरकार की ओर से करों में की गई इस कटौती ने बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है.

बाहरी चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक नैरेटिव बनाने वाले आलोचकों को भी कड़ा जवाब दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की मौजूदा आर्थिक चुनौतियां घरेलू नीतियों के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह बाहरी कारणों से प्रभावित हैं. उन्होंने '3Fs' यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई.

"चुनौतियां आंतरिक नहीं बल्कि बाहरी हैं, क्योंकि सोना, ईंधन और उर्वरक के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की भारी आवश्यकता होती है. भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी हुई है." — निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री

घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए सख्त कदम

ईंधन की घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर अतिरिक्त टैक्स या सेस भी लागू किया है. वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार देश की घरेलू मांग को पूरा किए बिना सिर्फ विदेशी मुद्रा कमाने के उद्देश्य से ईंधन के निर्यात की अनुमति नहीं दे सकती. इसके अलावा प्लास्टिक, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर्स को सहारा देने के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क छूट को 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है.

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के व्यापारिक हितों की रक्षा करने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत लघु उद्योगों के कार्यशील पूंजी संकट को दूर करने के लिए सभी बकाया भुगतानों को अनिवार्य रूप से 45 दिनों की समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कहा गया है.


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