भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में बढ़ती नकदी की मांग को देखते हुए जल्द ही प्लास्टिक के नोट (पॉलिमर बैंकनोट) पेश करने की तैयारी कर रहा है. केंद्रीय बैंक ने इसके लिए अपने करीब एक दशक पुराने प्रस्ताव को दोबारा शुरू कर दिया है. बाजार में नकदी के बढ़ते चलन और गंदे नोटों की समस्या से निपटने के लिए यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है. शुरुआत में केंद्रीय बैंक कुछ चुनिंदा शहरों में ट्रायल के तौर पर इन नए नोटों को जारी कर सकता है.
बढ़ती मांग और गंदे नोटों से मिलेगा छुटकारा
देश में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद बाजार में कागजी करेंसी की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही छोटे मूल्य वाले कागजी नोट (जैसे 10, 20 और 50 रुपये) बहुत जल्दी खराब और गंदे हो जाते हैं. आरबीआई इन गंदे नोटों को बदलने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है. प्लास्टिक के नोट आने से इस समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा क्योंकि ये नोट पानी में भी खराब नहीं होते हैं.
5 गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं पॉलिमर नोट
पॉलिमर बैंकनोट खास तरह के प्लास्टिक मटीरियल से बनाए जाते हैं. ये पारंपरिक सूती धागे और कागज से बने नोटों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक चलते हैं.
इन नोटों को आसानी से फाड़ा नहीं जा सकता है.
इन पर पानी, तेल या गंदगी का कोई असर नहीं पड़ता है.
इनकी छपाई में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स का उपयोग होता है, जिससे नकली नोट बनाना नामुमकिन हो जाता है.
पहले भी हो चुकी है ट्रायल की कोशिश
आरबीआई ने साल 2014 में देश के पांच अलग-अलग जलवायु वाले शहरों में प्लास्टिक के नोटों का ट्रायल करने की योजना बनाई थी. इन शहरों में कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर शामिल थे. हालांकि, तकनीकी कारणों और अन्य प्राथमिकताओं की वजह से यह योजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रही. अब केंद्रीय बैंक इस योजना पर पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है.
दुनिया भर के 30 से अधिक देशों में वर्तमान में प्लास्टिक करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले साल 1988 में पॉलिमर नोटों की शुरुआत की थी. इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, वियतनाम और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने भी इसे पूरी तरह अपना लिया है. भारत भी अब इस सूची में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.