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‘मैं IAS हूं, बिल मेरा PA देगा’, इंदौर में फर्जी अफसर गिरफ्तार

इंदौर में फर्जी IAS बनकर होटल में ठहरने वाले हिमांशु पांचाल ने खाना खाने के बाद बिल देने से इनकार किया। पुलिस जांच में उसकी फर्जी अफसर वाली पहचान और ठगी का तरीका सामने आया।

ई-इंदौर डेस्क 03 Sep 2026 8 बार देखा गया India
‘मैं IAS हूं, बिल मेरा PA देगा’, इंदौर में फर्जी अफसर गिरफ्तार

‘मैं IAS हूं, बिल मेरा PA देगा’, इंदौर में फर्जी अफसर गिरफ्तार  |  ई-इंदौर फोटो

इंदौर के लसूड़िया इलाके में पुलिस ने 28 वर्षीय हिमांशु पांचाल को फर्जी IAS अधिकारी और जिला कलेक्टर बनकर रहने के आरोप में गिरफ्तार किया है। मामला होटल के बिल को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आया।

हिमांशु मूल रूप से अहमदाबाद, गुजरात का रहने वाला है। वह इंदौर के ओमैक्स सिटी-1 स्थित शुभ आंगन प्रीमियम में किराए के मकान में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह खुद को ‘IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर’ बताता था।

मुख्य घटना

मामला तब खुला जब हिमांशु एक होटल में खाना खाने पहुंचा। बिल चुकाने की बारी आई तो उसने भुगतान के लिए अपने निजी सहायक के आने की बात कही। होटल की सूचना के बाद लसूड़िया पुलिस मौके पर पहुंची और उससे पूछताछ की।

हिमांशु ने शुरुआत में खुद को राज सोनी और IAS अधिकारी बताया। पुलिस ने उससे पदस्थापना और IAS अधिकारी होने से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई वैध प्रमाण नहीं दिखा सका। पूछताछ में उसने अपना वास्तविक नाम हिमांशु पांचाल बताया।

पुलिस उसके किराए के मकान तक पहुंची तो वहां भी फर्जी पहचान के सबूत मिले। घर के बाहर काले रंग की नेमप्लेट पर ‘IAS RAJ SONI – District Collector’ लिखा था। अंदर ‘सत्यमेव जयते’ और कलेक्टर पद से जुड़ी सामग्री भी मिली।

हिमांशु कौन है और कहां से आया?

पुलिस के अनुसार हिमांशु पांचाल अहमदाबाद, गुजरात का निवासी है। वह पहले अहमदाबाद की एक IT कंपनी में काम कर चुका है। करीब एक महीने पहले वह इंदौर आया था।

इंदौर आने के करीब 15 दिन बाद उसने मकान के बाहर फर्जी IAS नेमप्लेट लगाई। इसके जरिए वह आसपास के लोगों के सामने खुद को वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश करता था।

कैसे करता था लोगों को प्रभावित?

पुलिस की जांच में सामने आया कि हिमांशु अपने पहनावे और बोलचाल से भी अधिकारी जैसी छवि बनाने की कोशिश करता था। वह अंग्रेजी में बातचीत करता था और अक्सर सफेद शर्ट पहनता था।

उसने अपनी कार के लिए ड्राइवर रखने की कोशिश भी की। ड्राइवरों को सरकारी नौकरी मिलने का भरोसा दिलाकर उनसे कार चलवाने की बात सामने आई है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि कुछ ड्राइवरों को प्रभावित करने के लिए उसने होटल में पार्टी दी थी।

हिमांशु ने खुद को केवल अधिकारियों के सामने ही नहीं, बल्कि निजी स्तर पर भी IAS बताया। पुलिस की जांच में उसके वैवाहिक वेबसाइटों पर बनाए गए प्रोफाइल की जानकारी सामने आई, जहां उसने खुद को IAS अधिकारी बताया था और शादी के लिए लड़की की तलाश कर रहा था।

उसने ऐसा क्यों किया?

पूछताछ में हिमांशु ने बताया कि वह समाज में अपना रुतबा, प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ाने के लिए खुद को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जिला कलेक्टर बताता था।

हालांकि पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी IAS बनकर उसने किसी से आर्थिक लाभ लिया, किसी को प्रभावित किया या सरकारी काम में हस्तक्षेप करने की कोशिश की या नहीं। इस संबंध में अभी पूरी जांच बाकी है।

प्रशासन की कार्रवाई

लसूड़िया पुलिस ने हिमांशु के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है। उसके मकान से फर्जी नेमप्लेट, फोटो फ्रेम और प्रशासनिक अधिकारी जैसी पहचान बनाने वाली अन्य सामग्री बरामद की गई।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इंदौर में उसने कितने लोगों से संपर्क किया और क्या फर्जी अधिकारी बनकर उसने किसी अन्य व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी की।

गुजरात में भी दर्ज है मामला

हिमांशु के पुराने रिकॉर्ड की जांच में गुजरात के गांधीनगर जिले के अडालज थाने में दर्ज एक मामला सामने आया है। यह FIR 23 मई 2026 को दर्ज हुई थी। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इसमें BNS की धारा 316(5) और 318(2) लगाई गई थी।

इंदौर पुलिस इस पुराने मामले से जुड़े तथ्यों की भी जानकारी जुटा रही है।

हाल में ऐसे और मामले

मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में फर्जी IAS-IPS बनकर लोगों को प्रभावित करने या ठगने के कई मामले सामने आए हैं। इनमें भोपाल की तृप्ति सिंह राजपूत का मामला भी शामिल है। उसके खिलाफ भोपाल और अशोकनगर में चार मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। एक मामले में होटल लीज दिलाने के नाम पर ₹50 लाख की ठगी का आरोप है।

भोपाल में ही ऋषि कुमार यादव नाम के आरोपी पर खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये लेने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब एक दर्जन युवाओं को फर्जी नौकरी के नियुक्ति पत्र भी दिए थे।

अगस्त 2026 में अशोकनगर के चंदेरी में भी भाई-बहन पर फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों से सरकारी नौकरी के नाम पर ₹9.8 लाख ठगने का आरोप लगा था।

अब आगे क्या होगा

इंदौर पुलिस हिमांशु के पुराने रिकॉर्ड, उसके संपर्कों और फर्जी अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करने के मामलों की जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इंदौर में उसने कितने लोगों को प्रभावित किया या उससे किसी को आर्थिक नुकसान हुआ।

जनता पर प्रभाव

यह मामला बताता है कि केवल पद, पहनावे, अंग्रेजी बातचीत या सरकारी जैसी नेमप्लेट देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा नहीं करना चाहिए। खासकर नौकरी, सरकारी काम या आर्थिक लेन-देन से जुड़े दावों में आधिकारिक दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • आरोपी का नाम हिमांशु पांचाल, उम्र 28 वर्ष है।
  • वह अहमदाबाद, गुजरात का रहने वाला है।
  • इंदौर में ओमैक्स सिटी-1 में किराए पर रह रहा था।
  • खुद को IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर बताता था।
  • घर के बाहर फर्जी IAS नेमप्लेट लगी थी।
  • होटल के बिल विवाद के बाद मामला सामने आया।
  • गुजरात के अडालज थाने में मई 2026 में भी मामला दर्ज हुआ था।
  • लसूड़िया पुलिस ने BNS की धारा 204 के तहत कार्रवाई की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. इंदौर में पकड़ा गया फर्जी IAS कौन है?

आरोपी की पहचान 28 वर्षीय हिमांशु पांचाल के रूप में हुई है। वह अहमदाबाद का रहने वाला है।

Q2. फर्जी IAS का मामला कैसे खुला?

होटल में खाना खाने के बाद बिल भुगतान को लेकर विवाद हुआ। पुलिस की पूछताछ में उसकी असली पहचान सामने आई।

Q3. वह खुद को किस नाम से बताता था?

वह खुद को IAS राज सोनी और जिला कलेक्टर बताता था। उसके घर के बाहर भी इसी नाम की नेमप्लेट मिली।

Q4. क्या उसके खिलाफ पहले भी मामला दर्ज है?

हां। गुजरात के गांधीनगर जिले के अडालज थाने में 23 मई 2026 को उसके खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में मिली है।

समापन

इंदौर पुलिस ने फर्जी IAS अधिकारी बनकर रह रहे हिमांशु पांचाल को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। होटल के बिल विवाद से शुरू हुई जांच में फर्जी नेमप्लेट और अधिकारी जैसी पहचान बनाने वाली सामग्री मिली, जबकि उसके खिलाफ गुजरात में भी पुराना मामला दर्ज है।

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