इंदौर में पूर्वी बायपास और मनमाड़-इंदौर रेलवे लाइन परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि बिना सहमति के अधिग्रहित की जा रही है और उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है।
क्यों हो रहा है विरोध?
केंद्र और राज्य सरकार पूर्वी बायपास और रेलवे लाइन परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। इन परियोजनाओं के लिए कई गांवों की जमीन चिन्हित की गई है। प्रभावित किसानों का आरोप है कि भूमि का मूल्यांकन बाजार दर से कम किया गया है।
किसानों ने कहा कि खेती उनकी आय का मुख्य स्रोत है। जमीन जाने के बाद उनके सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों ने रखीं ये मांगें
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि सरकार पहले किसानों से संवाद करे और फिर निर्णय ले।
कई किसानों ने बेहतर मुआवजा, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
परियोजनाओं का क्या है महत्व?
पूर्वी बायपास परियोजना से इंदौर में ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है। वहीं मनमाड़-इंदौर रेलवे लाइन से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।
प्रशासन का कहना है कि दोनों परियोजनाएं क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और नियमानुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
आगे क्या होगा?
किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन प्रभावित किसानों के साथ बैठक कर सकता है। इस बातचीत के बाद भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर आगे का रास्ता तय होगा।
फिलहाल किसानों का विरोध जारी है और यह मुद्दा इंदौर क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।