'I Support My Friends' Campaign to Build Peer Mental Health Support Network in Indore
इंदौर में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए 'आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स' (I Support My Friends) अभियान शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं के बीच ऐसी मित्र मंडली तैयार करना है, जो तनाव, अवसाद, अकेलेपन या भावनात्मक परेशानी के शुरुआती संकेत पहचान सके और जरूरत पड़ने पर सही मदद तक पहुंचाने में सहयोग करे। जिला प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और विशेषज्ञों की भागीदारी से यह अभियान लागू किया जाएगा।
क्या है 'आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स' अभियान?
अभियान की मूल सोच यह है कि किसी भी युवा की परेशानी सबसे पहले उसका दोस्त समझता है। इसलिए मित्रों को केवल भावनात्मक सहारा देने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जाएगा कि कब और कैसे किसी जरूरतमंद साथी को पेशेवर सहायता तक पहुंचाना है। यह मॉडल "पीयर सपोर्ट" यानी मित्र आधारित सहयोग पर आधारित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का दबाव, करियर की चिंता, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और सामाजिक अकेलापन कई छात्रों को मानसिक तनाव की ओर ले जाता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर मित्रों का सहयोग कई मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कैसे करेगा काम?
अभियान के तहत कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चयनित विद्यार्थियों को मानसिक तनाव के संकेत पहचानने, संवेदनशील संवाद करने, गोपनीयता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेने की जानकारी दी जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य छात्रों के बीच ऐसा भरोसेमंद माहौल तैयार करना है, जहां कोई भी युवा अपनी समस्या साझा करने में संकोच न करे। अभियान में आमने-सामने काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मानसिक स्वास्थ्य पर क्यों है फोकस?
राष्ट्रीय स्तर पर भी विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञ लगातार बता रहे हैं कि समय रहते भावनात्मक सहयोग मिलने से तनाव, अवसाद और आत्मघाती विचारों जैसी गंभीर स्थितियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ भी मित्र आधारित प्रारंभिक सहायता (Peer Support) को मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। हालांकि, यह चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं बल्कि शुरुआती सहयोग का माध्यम है।
आगे क्या होगा?
अभियान को पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया जाएगा। इसके परिणामों के आधार पर इसे अन्य कॉलेजों और छात्र समूहों तक विस्तार देने की योजना है।
प्रशासन का मानना है कि यदि विद्यार्थी अपने दोस्तों की भावनात्मक स्थिति को समय रहते समझ सकें, तो कई गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को शुरुआती स्तर पर रोका जा सकता है।