इंदौर में पानी विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं ने शहर के पेयजल में गंदगी और मिलावट के आरोप लगाए थे। इसके जवाब में सोमवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सार्वजनिक रूप से नल का पानी पीकर पानी की गुणवत्ता पर भरोसा जताया।
कांग्रेस ने उठाए पानी की गुणवत्ता पर सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया था कि इंदौर के कुछ इलाकों में दूषित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
इन आरोपों के बाद पानी विवाद शहर की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया। नगर निगम और कांग्रेस आमने-सामने आ गए।
मेयर ने किया पानी का प्रदर्शन
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम परिसर में नल का पानी पीया। उन्होंने कहा कि इंदौर का पेयजल नियमित जांच प्रक्रिया से गुजरता है। पानी की गुणवत्ता की निगरानी लगातार की जाती है।
महापौर ने कहा कि बिना वैज्ञानिक रिपोर्ट के ऐसे आरोप लोगों में भ्रम फैला सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की।
जांच रिपोर्ट का हवाला
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न जल स्रोतों और वितरण केंद्रों से नियमित सैंपल लिए जाते हैं। इनकी लैब जांच भी की जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि हाल की रिपोर्ट में पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया है।
आगे क्या होगा?
कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं नगर निगम ने कहा है कि यदि किसी क्षेत्र से शिकायत आती है तो वहां तुरंत सैंपलिंग कराई जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेयजल गुणवत्ता की नियमित जांच और पारदर्शी रिपोर्टिंग से लोगों का भरोसा मजबूत होता है।
इंदौर का पानी विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है, जबकि प्रशासन पानी की गुणवत्ता को सुरक्षित बता रहा है।