बेटिंग ऐप मामला इंदौर में एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। ऑनलाइन बेटिंग ऐप की जांच के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी का नाम सामने आया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर पुलिस के अनुसार, नाना पटवारी के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग मिले हैं। जांच के दौरान फोन से दो ऑनलाइन बेटिंग ऐप, तीन संदिग्ध मोबाइल नंबर और कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड सामने आए हैं।
पुलिस अब इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर नाना पटवारी से दोबारा पूछताछ की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन डिजिटल गतिविधियों का किसी ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क, संदिग्ध धन हस्तांतरण या कथित ड्रग पार्टी से कोई संबंध है।
संदिग्ध नंबरों और लेनदेन की हो रही जांच
डीसीपी नरेंद्र रावत ने बताया कि फोरेंसिक रिपोर्ट में मिले तीन मोबाइल नंबरों की पहचान की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन नंबरों से जुड़े लोगों की कथित नेटवर्क में क्या भूमिका थी।
इसके अलावा, राजेंद्र नगर थाना की विशेष जांच टीम मामले से जुड़े अन्य मोबाइल डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण कर रही है।
बेटिंग लिंक साझा करने के लिए इस्तेमाल होने का शक
जांच अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल में मिले दोनों ऐप का इस्तेमाल कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग लिंक साझा करने के लिए किया जाता था। फोरेंसिक जांच में कुछ ऐसे डिजिटल संकेत भी मिले हैं, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की ओर इशारा करते हैं।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि नाना पटवारी की किसी ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट में प्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सभी साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस क्या कर रही है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
कांग्रेस की क्या प्रतिक्रिया है?
अब तक इस मामले में कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। नाना पटवारी की ओर से भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच की जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जांच में केवल नाम सामने आने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाता है।
आगे क्या होगा?
पुलिस ऑनलाइन बेटिंग ऐप नेटवर्क से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी रखे हुए है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।