लाल किले पर वंदे मातरम इस साल 15 अगस्त को पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेगा। 2026 में राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, इसलिए 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे विशेष रूप से शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के तय क्रम के अनुसार प्रधानमंत्री के लाल किले की प्राचीर पर पहुंचने के बाद पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और फिर राष्ट्रगान होगा।
लाल किले पर वंदे मातरम का खास आयोजन
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार वंदे मातरम को लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मौजूद 27,000 से अधिक गणमान्य अतिथि, आगंतुक और छात्रों को राष्ट्रीय गीत के दौरान खड़ा रहना होगा।
इस अवसर पर समारोह स्थल की सजावट में भी वंदे मातरम के 150 वर्ष की झलक दिखाई जाएगी। ज्ञानपथ पर 2,500 एनसीसी कैडेट और माय भारत के स्वयंसेवक वंदे मातरम की आकृति बनाएंगे। एक Mi-17 हेलीकॉप्टर भी 150 वर्ष पूरे होने से जुड़ा बैनर लेकर पहुंचेगा और फूलों की वर्षा करेगा।
150 साल पुराना है वंदे मातरम का इतिहास
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। इसका पहला प्रकाशन 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में हुआ था। बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ, जो 1882 में प्रकाशित हुआ, में शामिल किया गया।
समय के साथ यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रमुख प्रतीक बन गया। कांग्रेस के अधिवेशनों और स्वतंत्रता आंदोलनों में भी इसका उपयोग हुआ। 2026 में इसके 150 वर्ष पूरे होने के कारण पूरे वर्ष इससे जुड़े आयोजन और कार्यक्रम हो रहे हैं।
स्वतंत्रता दिवस में ‘युवा शक्ति’ पर भी रहेगा फोकस
इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘Yuva Shakti: Leading the journey to Viksit Bharat @2047’ विषय भी प्रमुख रहेगा। सरकार का फोकस विज्ञान, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को सामने लाने पर है।
अंतरराष्ट्रीय फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथेमेटिकल ओलंपियाड 2026 में पदक जीतने वाले 19 छात्रों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। 500 से अधिक दिल्ली सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी समारोह में बुलाया गया है।
करीब 5,000 विशेष मेहमान भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगे। इनमें अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग और ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें देश के विकास में विशेष भूमिका निभाने वाला माना गया है।
आगे क्या होगा?
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह लाल किले में आयोजित होगा। वंदे मातरम को पहली बार आधिकारिक कार्यक्रम के तय क्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान से पहले शामिल किया गया है।
दिल्ली मेट्रो को सुबह 4 बजे से संचालित करने की जानकारी भी दी गई है। आमंत्रित अतिथियों को मेट्रो यात्रा के लिए ई-निमंत्रण के साथ QR कोड उपलब्ध कराए जाएंगे।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह बदलाव स्वतंत्रता दिवस के पारंपरिक समारोह में एक नया ऐतिहासिक अध्याय जोड़ेगा। लाल किले पर वंदे मातरम का आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रहा है।
युवा भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में छात्र, एनसीसी कैडेट और युवा स्वयंसेवक भी समारोह से जुड़े हैं। इससे 2026 के स्वतंत्रता दिवस में राष्ट्रीय विरासत और नई पीढ़ी, दोनों को एक साथ प्रमुखता मिलेगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
- 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा।
- वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
- पहली बार लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम गाया जाएगा।
- राष्ट्रीय गीत के बाद ध्वजारोहण और फिर राष्ट्रगान होगा।
- समारोह में 27,000 से अधिक लोग मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।
- 2,500 एनसीसी कैडेट और माय भारत स्वयंसेवक विशेष प्रस्तुति का हिस्सा होंगे।
- समारोह की प्रमुख थीम में ‘युवा शक्ति’ और विकसित भारत 2047 शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. लाल किले पर वंदे मातरम कब गाया जाएगा?
15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा।
Q2. वंदे मातरम को इस साल विशेष रूप से क्यों शामिल किया गया है?
2026 में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी अवसर पर इसे स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष स्थान दिया गया है।
Q3. वंदे मातरम के बाद कार्यक्रम में क्या होगा?
राष्ट्रीय गीत के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और इसके बाद राष्ट्रगान होगा।
Q4. 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह की प्रमुख थीम क्या है?
समारोह में ‘युवा शक्ति’ को विशेष महत्व दिया गया है, जिसमें विकसित भारत 2047 की यात्रा में युवाओं की भूमिका पर फोकस रहेगा।