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रिकॉर्ड निर्यात: भारत का एक्सपोर्ट 45.2 अरब डॉलर, व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर

भारत का निर्यात मई 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का माल निर्यात 45.2 अरब डॉलर तक पहुंचा। हालांकि आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर पर बना रहा।

ई-इंदौर डेस्क 16 Jun 2026 6 बार देखा गया Business
रिकॉर्ड निर्यात: भारत का एक्सपोर्ट 45.2 अरब डॉलर, व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर

रिकॉर्ड निर्यात: भारत का एक्सपोर्ट 45.2 अरब डॉलर, व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर  |  ई-इंदौर फोटो

भारत का निर्यात मई 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का माल निर्यात 45.2 अरब डॉलर तक पहुंचा। हालांकि आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर पर बना रहा।

निर्यात में दर्ज हुई मजबूत बढ़त

मई 2026 में निर्यात ने अब तक का नया रिकॉर्ड बनाया। इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और रसायन उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ने से निर्यात को मजबूती मिली।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बेहतर हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

आयात बढ़ने से व्यापार घाटा कायम

रिकॉर्ड निर्यात के बावजूद व्यापार घाटा पूरी तरह कम नहीं हो सका। इसका मुख्य कारण आयात में हुई तेज वृद्धि रही। कच्चे तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और औद्योगिक कच्चे माल के आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मई में व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर रहा। यह पिछले महीने के मुकाबले लगभग स्थिर स्तर पर बना हुआ है।

किन क्षेत्रों ने दिया सबसे बड़ा योगदान?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इंजीनियरिंग वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधि उत्पाद और रसायन क्षेत्र निर्यात वृद्धि के प्रमुख आधार रहे। सेवा क्षेत्र भी विदेशी मुद्रा कमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ने से रोजगार और निवेश को भी लाभ मिल सकता है।

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक मांग और व्यापार परिस्थितियां भारत के निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित करेंगी। सरकार भी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है।

फिलहाल रिकॉर्ड निर्यात ने भारतीय अर्थव्यवस्था को सकारात्मक संकेत दिया है, जबकि व्यापार घाटे पर नजर बनाए रखना चुनौती बना हुआ है।

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