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DAVV में नकल जांच का नया संकट, जब्त मोबाइल की बैटरी खत्म

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में नकल के मामलों की जांच के दौरान जब्त मोबाइल फोन की बैटरी खत्म होने से नई परेशानी सामने आई है। महीनों तक जमा रहने वाले फोन बंद हो जाते हैं, जिससे उनमें मौजूद डिजिटल सबूतों की जांच मुश्किल हो जाती है। अब विश्वविद्यालय जब्त मोबाइल की तत्काल जांच के लिए अलग समिति बनाने जा रहा है।

ई-इंदौर डेस्क 09 Sep 2026 18 बार देखा गया Education
DAVV में नकल जांच का नया संकट, जब्त मोबाइल की बैटरी खत्म

DAVV में नकल जांच का नया संकट, जब्त मोबाइल की बैटरी खत्म  |  ई-इंदौर फोटो

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में परीक्षा के दौरान नकल के मामलों की जांच में एक नई तकनीकी परेशानी सामने आई है। नकल के संदेह में जब्त किए गए विद्यार्थियों के मोबाइल फोन लंबे समय तक विश्वविद्यालय में जमा रहते हैं। जांच की बारी आने तक कई मोबाइल की बैटरी पूरी तरह खत्म हो जाती है और फोन चालू नहीं हो पाते। इससे मोबाइल में मौजूद डिजिटल सबूतों की जांच प्रभावित हो रही है।

समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालय ने जब्त मोबाइल की तुरंत तकनीकी जांच के लिए अलग मोबाइल इन्वेस्टिगेशन कमेटी बनाने का फैसला किया है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

मुख्य घटना

DAVV में परीक्षा के दौरान यदि किसी विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है, तो उसके खिलाफ अनुचित साधन यानी UFM प्रकरण बनाया जा सकता है। मोबाइल को जांच के लिए विश्वविद्यालय में जमा किया जाता है।

मौजूदा व्यवस्था में मोबाइल लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है और मामला बाद में संबंधित समिति के सामने आता है। कई बार यह प्रक्रिया शुरू होने तक फोन की बैटरी खत्म हो जाती है। फोन चालू नहीं होने पर यह जांचना मुश्किल हो जाता है कि परीक्षा के दौरान उसमें क्या देखा गया था।

पृष्ठभूमि

DAVV में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर सालभर में 780 से ज्यादा परीक्षाएं आयोजित होती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हर साल करीब 250 से 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं।

कागज, गाइड या किताब के पन्ने जैसे सबूत मिलने वाले मामलों में जांच अपेक्षाकृत आसान होती है। मोबाइल से जुड़े मामलों में डिजिटल जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।

मोबाइल की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परीक्षा के दौरान फोन में क्या सामग्री देखी गई और उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ। इसलिए जब्त डिवाइस की समय पर जांच जरूरी मानी जा रही है।

प्रशासन की कार्रवाई

विश्वविद्यालय ने अब मोबाइल से जुड़े नकल मामलों के लिए अलग जांच व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है। नई समिति का मुख्य काम जब्त मोबाइल की तुरंत तकनीकी जांच करना होगा।

कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के अनुसार, परीक्षा में मोबाइल लेकर जाना नियमों के खिलाफ है। यदि परीक्षा के दौरान विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या केंद्राध्यक्ष UFM प्रकरण बना सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य मोबाइल से जुड़े तथ्य समय पर जुटाना है।

अब आगे क्या होगा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जब्त मोबाइल को लंबे समय तक बिना जांच के रखने के बजाय जल्द तकनीकी परीक्षण करने की कोशिश की जाएगी।

इससे मोबाइल में मौजूद डिजिटल जानकारी समय रहते सुरक्षित करने और नकल के मामले में उपलब्ध सबूतों का बेहतर मूल्यांकन करने में मदद मिल सकती है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि इससे UFM मामलों के निपटारे में होने वाली देरी कम होगी।

जनता पर प्रभाव

इस फैसले का सीधा असर DAVV के परीक्षा और अनुशासन से जुड़े मामलों पर पड़ेगा। विद्यार्थियों के नकल प्रकरणों में निर्णय डिजिटल सबूतों की उपलब्धता के आधार पर अधिक स्पष्ट तरीके से लेने में मदद मिल सकती है।

साथ ही, जब्त मोबाइल की समय पर जांच होने से लंबे समय तक लंबित रहने वाले मामलों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • DAVV में सालभर में 780 से ज्यादा परीक्षाएं होती हैं।

  • करीब 250 से 300 नकल प्रकरण हर साल सामने आते हैं।

  • मोबाइल जब्त होने के बाद लंबे समय तक जमा रहने से बैटरी खत्म हो रही है।

  • फोन बंद होने पर डिजिटल डेटा की जांच प्रभावित होती है।

  • मोबाइल की तत्काल जांच के लिए अलग समिति बनाने को मंजूरी दी गई है।

  • नई समिति मोबाइल से जुड़े नकल मामलों के तकनीकी सबूतों की जांच करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. DAVV में नई समस्या क्या सामने आई है?

नकल के मामलों में जब्त मोबाइल लंबे समय तक जमा रहने के कारण बंद हो रहे हैं। इससे डिजिटल सबूतों की जांच प्रभावित हो रही है।

2. DAVV में हर साल कितने नकल मामले आते हैं?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हर साल करीब 250 से 300 UFM यानी नकल प्रकरण सामने आते हैं।

3. नई समिति क्यों बनाई जा रही है?

जब्त मोबाइल की जल्द तकनीकी जांच करने और उनमें मौजूद डिजिटल सबूतों को समय पर सुरक्षित व जांचने के लिए अलग समिति बनाई जाएगी।

4. मोबाइल से क्या जानकारी मिल सकती है?

तकनीकी जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल में क्या देखा गया और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया था।

समापन

DAVV में मोबाइल से जुड़े नकल मामलों ने परीक्षा व्यवस्था के सामने एक नई तकनीकी चुनौती खड़ी की है। लंबे समय तक जब्त रहने के कारण मोबाइल की बैटरी खत्म होने से डिजिटल सबूतों की जांच प्रभावित हो रही थी। अब अलग मोबाइल जांच समिति बनाने का फैसला इस समस्या को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नकल मामलों की जांच अधिक समयबद्ध और तथ्य आधारित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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