हरिद्वार में कांवड़ मेला 2026 मंगलवार को संपन्न हो गया। पुलिस-प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक इस बार करीब 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। मेले के बाद धर्मनगरी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलने की जानकारी सामने आई है।
मेले के दौरान हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर, सप्तऋषि और हरकी पैड़ी सहित आसपास के इलाकों में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ रही। प्रशासन ने अब मेले के बाद सफाई व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है। 12 से 18 अगस्त तक विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा।
मुख्य घटना: 4.80 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
इस वर्ष कांवड़ मेले की शुरुआत 30 जुलाई से हुई थी। अंतिम दिन मंगलवार को भी बड़ी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार पहुंचे और गंगा से जल लेकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम 6 बजे तक 4 करोड़ 43 लाख 78 हजार कांवड़ यात्री जल लेकर हरिद्वार से निकल चुके थे। मंगलवार को करीब 36 लाख 62 हजार और कांवड़ियों ने गंगाजल भरा। इसके बाद कुल संख्या बढ़कर 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार हो गई।
पिछले वर्ष 2025 में करीब 4 करोड़ 52 लाख 90 हजार श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे थे। इस तरह इस वर्ष संख्या में लगभग 27.5 लाख की बढ़ोतरी हुई।
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था पर भी बड़ा दबाव पड़ा।
डाक कांवड़ के दौरान बढ़ा कूड़ा
नगर आयुक्त नंदन कुमार के अनुसार, डाक कांवड़ के केवल दो दिनों में ही शहर में करीब 1,700 मीट्रिक टन कूड़ा फैला। मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पैदल और वाहनों से आने के कारण कई इलाकों में सफाई कर्मियों को लगातार काम करना पड़ा।
मेले के समाप्त होने के बाद जब घाटों और आसपास के क्षेत्रों से भीड़ कम हुई, तब कूड़े की वास्तविक स्थिति सामने आई। इसके बाद नगर निगम ने सफाई दलों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजना शुरू किया।
पृष्ठभूमि: इतने बड़े आयोजन में कूड़ा क्यों बढ़ता है?
हरिद्वार में कांवड़ मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसमें उत्तर भारत के अलावा कई अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इतनी बड़ी भीड़ के कारण भोजन सामग्री, पानी की बोतलें, प्लास्टिक, कपड़े और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं से कचरा बढ़ता है। यात्रा के दौरान इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं श्रद्धालुओं के वापस लौटने के बाद विभिन्न स्थानों पर रह जाती हैं।
इस बार प्रशासन के अनुसार कुल कूड़े का आंकड़ा करीब 7 हजार मीट्रिक टन रहा। कूड़े की मात्रा को देखते हुए इसे सामान्य शहर की नियमित सफाई व्यवस्था से अलग बड़े अभियान के रूप में संभालना पड़ रहा है।
कपड़ों को दोबारा उपयोग में लाने की तैयारी
कांवड़ मेले के बाद केवल सामान्य कचरे की सफाई ही नहीं की जा रही है। प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की ओर से छोड़े गए 2 हजार मीट्रिक टन से अधिक कपड़ों को अलग करके पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाएगा।
इन कपड़ों से कपास तैयार करने की योजना है। इसके अलावा सूखे और गीले कचरे के साथ प्लास्टिक और कपड़ों को अलग-अलग किया जा रहा है। इससे कचरे के निपटान को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
प्रशासन की कार्रवाई: 12 से 18 अगस्त तक विशेष सफाई
मेले के समाप्त होने के तुरंत बाद प्रशासन ने विशेष सफाई अभियान की योजना तैयार की है। यह अभियान 12 अगस्त से 18 अगस्त तक चलेगा।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अभियान की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत और ग्राम पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
घाटों की सफाई को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बाद शहर की गलियों और वार्डों में सफाई दल भेजे जाएंगे।
प्रशासन ने सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी करने की बात भी कही है। अभियान में अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय रखने पर जोर दिया गया है।
आगे क्या होगा?
अभी प्राथमिकता मेले के बाद जमा हुए कचरे को हटाना और उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटना है।
सूखा कचरा, गीला कचरा, प्लास्टिक और कपड़ों को अलग करने के बाद उनके निपटान और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कपड़ों को पुनर्चक्रित कर कपास तैयार करने की योजना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
प्रशासन ने सफाई अभियान में सरकारी विभागों के साथ सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, व्यापारिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी की अपील की है।
जनता पर प्रभाव
हरिद्वार कांवड़ मेला 2026 के दौरान करोड़ों लोगों की मौजूदगी से स्थानीय व्यापार और धार्मिक गतिविधियों में तेजी आई, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा।
मेले के बाद हजारों टन कूड़ा हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। जब तक सफाई अभियान पूरा नहीं होता, स्थानीय लोगों और आने वाले यात्रियों को कुछ क्षेत्रों में सफाई कार्य के कारण असुविधा हो सकती है।
घाटों, बाजारों, सड़कों और भीड़ वाले क्षेत्रों की सफाई पूरी होने से शहर की सामान्य व्यवस्था को दोबारा सुचारू करने में मदद मिलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन के साथ कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- कांवड़ मेला 30 जुलाई से शुरू हुआ था।
- इस वर्ष करीब 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे।
- अंतिम दिन करीब 36 लाख 62 हजार कांवड़ियों ने गंगाजल लिया।
- 2025 में करीब 4 करोड़ 52 लाख 90 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे।
- मेले के बाद करीब 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलने की जानकारी है।
- डाक कांवड़ के दो दिनों में करीब 1,700 मीट्रिक टन कूड़ा फैला।
- 12 से 18 अगस्त तक विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा।
- 2 हजार मीट्रिक टन से अधिक कपड़ों को पुनर्चक्रण के लिए अलग किया जाएगा।
- सूखे, गीले, प्लास्टिक और कपड़ों के कचरे को अलग-अलग करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. हरिद्वार कांवड़ मेले 2026 में कितने श्रद्धालु पहुंचे?
पुलिस-प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष करीब 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे।
2. कांवड़ मेले के बाद कितना कूड़ा निकला?
मेले के बाद हरिद्वार में करीब 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलने की जानकारी सामने आई है।
3. हरिद्वार में सफाई अभियान कब तक चलेगा?
प्रशासन के अनुसार विशेष सफाई अभियान 12 से 18 अगस्त तक चलाया जाएगा।
4. सबसे ज्यादा कूड़ा कब फैला?
नगर आयुक्त के अनुसार डाक कांवड़ के दो दिनों में ही करीब 1,700 मीट्रिक टन कूड़ा फैला था।
5. कांवड़ मेले के बाद छोड़े गए कपड़ों का क्या होगा?
प्रशासन के अनुसार 2 हजार मीट्रिक टन से अधिक कपड़ों को अलग करके पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाएगा। इनसे कपास तैयार करने की योजना है।
6. सफाई अभियान में कौन-कौन शामिल होगा?
नगर निकायों और पंचायतों के अलावा प्रशासन ने सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, व्यापार मंडलों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की है।