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'कुत्ता पागल हो गया है, सुअर बहुत हो गया है': जयपुर नगर निगम का शिकायत पोर्टल

जयपुर नगर निगम का शिकायत पोर्टल अपनी आसान बोलचाल की हिंदी के कारण वायरल है। जानिए वेबसाइट पर कुत्ते, कचरे और अन्य समस्याओं की कौन-कौन सी श्रेणियां हैं।

ई-इंदौर डेस्क 20 Aug 2026 15 बार देखा गया India
'कुत्ता पागल हो गया है, सुअर बहुत हो गया है': जयपुर नगर निगम का शिकायत पोर्टल

'कुत्ता पागल हो गया है, सुअर बहुत हो गया है': जयपुर नगर निगम का शिकायत पोर्टल  |  ई-इंदौर फोटो

शिकायत दर्ज करने का अनोखा और आसान तरीका

जयपुर नगर निगम शिकायत पोर्टल इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वजह है पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के लिए इस्तेमाल की गई बेहद आसान और बोलचाल की हिंदी।

सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में औपचारिक सरकारी भाषा की जगह ऐसे विकल्प दिखाई देते हैं, जिन्हें आम नागरिक रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल करते हैं। इनमें “कुत्ता बहुत हो गया है”, “सुअर बहुत हो गया है” और “कुत्ता पागल हो गया है पकड़वाना है” जैसे विकल्प शामिल हैं।

इन स्क्रीनशॉट को सबसे पहले रवि हांडा नाम के एक यूजर ने X पर साझा किया था। इसके बाद जयपुर नगर निगम शिकायत पोर्टल की भाषा और डिजाइन को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

पोर्टल पर शिकायतों की कौन-कौन सी श्रेणियां हैं?

पोर्टल पर अलग-अलग नागरिक समस्याओं के लिए श्रेणियां और उनके अंदर सीधे समझ आने वाले विकल्प दिए गए हैं। इससे शिकायतकर्ता को सरकारी शब्दावली समझने की जरूरत नहीं पड़ती।

आवारा और बेसहारा जानवरों से जुड़ी शिकायतें

इस श्रेणी में दिए गए विकल्पों में शामिल हैं:

  • कुत्ता बहुत हो गया है
  • बंदर बहुत हो गया है
  • सुअर बहुत हो गया है
  • कुत्ता पागल हो गया है पकड़वाना है
  • अन्य

यानी यदि किसी इलाके में आवारा जानवरों की संख्या बढ़ गई है या किसी संदिग्ध कुत्ते को पकड़वाना है, तो नागरिक सीधे अपनी समस्या से मेल खाने वाला विकल्प चुन सकते हैं।

मृत जानवर की शिकायत के लिए क्या विकल्प हैं?

पोर्टल पर मृत पशुओं के लिए भी अलग श्रेणी दिखाई गई है। इसमें समस्या को सीधी भाषा में लिखा गया है।

उपलब्ध विकल्पों में शामिल हैं:

  • जानवर मर गया है
  • गाय मर गई है
  • बैल मर गया है
  • घोड़ा मर गया है
  • गाय का बच्चा मर गया है
  • अन्य

इस तरह नागरिक को किसी जटिल शब्द या विभागीय भाषा का सहारा नहीं लेना पड़ता।

कचरा गाड़ी को लेकर भी हैं सीधे विकल्प

जयपुर नगर निगम शिकायत पोर्टल पर घर-घर कचरा संग्रहण से जुड़ी समस्याओं को भी आम भाषा में रखा गया है।

इस श्रेणी में शामिल विकल्प हैं:

  • गाड़ी नहीं आ रही है
  • गाड़ी समय पर नहीं आती है
  • गाड़ी पर गाना नहीं बजता है
  • गाड़ी नहीं रुकती है, तेजी से चलती जाती है
  • हेल्पर नहीं आता है
  • गाड़ी वाला पैसे मांगता है
  • हेल्पर कचरा नहीं उठाता है

ये विकल्प सीधे उन समस्याओं को बताते हैं, जिनका सामना लोग अपने मोहल्ले में करते हैं।

सड़क सफाई और अन्य नागरिक समस्याओं की भी सुविधा

वायरल जानकारी के अनुसार, पोर्टल केवल आवारा जानवरों और कचरा संग्रहण तक सीमित नहीं है। इसमें सड़क सफाई, मलबा हटाने और खाली प्लॉट में जमा कचरे जैसी समस्याओं से जुड़ी शिकायतों के लिए भी श्रेणियां मौजूद हैं।

हर समस्या को आसान भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है, ताकि आम नागरिक बिना भ्रम के सही शिकायत विकल्प चुन सके।

आसान भाषा क्यों बन रही है चर्चा का कारण?

सरकारी वेबसाइटों और पोर्टलों पर अक्सर तकनीकी या औपचारिक शब्दों का इस्तेमाल होता है। इससे कई लोगों को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि उनकी समस्या किस श्रेणी में आती है।

लेकिन यहां “गाड़ी नहीं रुकती है, तेजी से चलती जाती है” जैसे विकल्प सीधे नागरिक की समस्या बताते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस डिजाइन को समझने में आसान बताया।

कुछ लोगों ने इसे आम नागरिकों के लिए उपयोगी बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने विकल्पों की भाषा को लेकर मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दीं।

लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?

इस तरह की भाषा का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया आम लोगों के लिए आसान बने। नागरिकों को अपनी समस्या को सरकारी भाषा में बदलने या सही तकनीकी शब्द खोजने की जरूरत नहीं पड़ती।

उन्हें केवल अपनी वास्तविक समस्या से मिलता-जुलता विकल्प चुनना होता है। इससे गलत श्रेणी में शिकायत दर्ज होने की संभावना भी कम हो सकती है।

महत्वपूर्ण बातें

  • जयपुर नगर निगम का शिकायत पोर्टल सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
  • पोर्टल पर आसान और बोलचाल की हिंदी का इस्तेमाल किया गया है।
  • आवारा कुत्ते, बंदर और सुअर से जुड़ी शिकायतों के अलग विकल्प हैं।
  • “कुत्ता पागल हो गया है पकड़वाना है” जैसा सीधा विकल्प भी दिखाई देता है।
  • मृत पशुओं की शिकायत के लिए अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं।
  • कचरा गाड़ी के न आने, न रुकने और समय पर न आने जैसी समस्याओं के विकल्प मौजूद हैं।
  • सड़क सफाई, मलबा और खाली प्लॉट के कचरे से जुड़ी समस्याओं की भी शिकायत की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. जयपुर नगर निगम का शिकायत पोर्टल क्यों वायरल हुआ?

पोर्टल पर शिकायतों के लिए आसान और आम बोलचाल की हिंदी का इस्तेमाल किए जाने के कारण इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुए।

Q2. पोर्टल पर आवारा कुत्तों के लिए क्या शिकायत दर्ज की जा सकती है?

उपलब्ध विकल्पों में “कुत्ता बहुत हो गया है” और “कुत्ता पागल हो गया है पकड़वाना है” जैसे विकल्प शामिल हैं।

Q3. कचरा गाड़ी से जुड़ी कौन-कौन सी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं?

गाड़ी नहीं आने, समय पर नहीं आने, न रुकने, तेजी से चले जाने, हेल्पर के न आने और कचरा न उठाने जैसी समस्याओं के विकल्प दिए गए हैं।

Q4. क्या पोर्टल पर सिर्फ जानवरों और कचरे की शिकायत की जा सकती है?

नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सड़क सफाई, मलबा हटाने और खाली प्लॉट में कचरे जैसी अन्य नागरिक समस्याओं के लिए भी शिकायत श्रेणियां मौजूद हैं।

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