इंदौर में पकड़े गए 2 करोड़ रुपये के सोने की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अबू धाबी से लाया गया सोना किसी यात्री का नहीं था। इसके पीछे इंदौर का एक सराफा कारोबारी मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस और कस्टम विभाग अब पूरे Gold Smuggling Network की जांच कर रहे हैं।
कैसे चल रहा था गोल्ड स्मगलिंग का खेल?
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इंदौर का सराफा कारोबारी विदेश से आने वाले यात्रियों के जरिए सोना मंगवाता था। खासतौर पर अबू धाबी से आने वाली फ्लाइट का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, तस्करों का नेटवर्क विदेश में बैठे लोगों से संपर्क करता था। यात्रियों को कमीशन देकर उनके सामान या शरीर में सोना छिपाकर भारत भेजा जाता था। इंदौर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सोना कारोबारी के लोगों तक पहुंचाया जाता था।
कौन-कौन था नेटवर्क में शामिल?
कस्टम अधिकारियों को शक है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं था। इसमें विदेश में मौजूद एजेंट, कैरियर, स्थानीय रिसीवर और सराफा कारोबार से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या पहले भी इसी नेटवर्क के जरिए कई बार सोना भारत लाया गया था।
2 करोड़ रुपये का सोना कैसे पकड़ा गया?
हाल ही में देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर पर अबू धाबी से आए एक यात्री की जांच के दौरान करीब एक किलो से अधिक सोना बरामद हुआ। इसकी बाजार कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई।
पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर जांच इंदौर के सराफा कारोबारी तक पहुंची। इसके बाद उसके ठिकानों और संपर्कों की जांच शुरू की गई।
जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं?
कस्टम विभाग अब कारोबारी के मोबाइल, बैंक लेनदेन और विदेश कनेक्शन की जांच कर रहा है। एयरपोर्ट CCTV, यात्रा रिकॉर्ड और कॉल डिटेल भी खंगाले जा रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी जल्द सामने आ सकते हैं।
क्या होगा आगे?
यदि कारोबारी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो उसके खिलाफ कस्टम एक्ट, विदेश व्यापार नियमों और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां पूरे रैकेट का खुलासा करने में जुटी हैं।
इंदौर एयरपोर्ट पर पकड़े गए सोने की जांच अब केवल एक यात्री तक सीमित नहीं रही। एजेंसियां मान रही हैं कि इसके पीछे लंबे समय से सक्रिय संगठित गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क हो सकता है।