Indore to Develop 100-Acre City Forest with 2.5 Lakh Trees Using Miyawaki Technique
इंदौर सिटी फॉरेस्ट परियोजना शहर की सबसे बड़ी हरित योजनाओं में शामिल होने जा रही है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने करीब 100 एकड़ भूमि पर घना शहरी जंगल विकसित करने की योजना तैयार की है। इस परियोजना में मियावाकी तकनीक से लगभग 2.5 लाख पौधे लगाए जाएंगे। फिलहाल परियोजना प्रस्ताव और प्रारंभिक योजना पर काम चल रहा है। अंतिम स्वीकृतियों के बाद पौधारोपण चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
क्या है इंदौर सिटी फॉरेस्ट परियोजना?
IDA का उद्देश्य शहर में तेजी से घटते हरित क्षेत्र की भरपाई करना और एक बड़ा शहरी वन विकसित करना है। प्रस्तावित सिटी फॉरेस्ट में स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे ताकि क्षेत्र प्राकृतिक रूप से विकसित हो सके।
मियावाकी तकनीक में कम जगह पर अधिक घनत्व से पौधे लगाए जाते हैं। इससे सामान्य पौधारोपण की तुलना में जंगल तेजी से विकसित होता है और जैव विविधता बढ़ती है।
कहां बनेगा सिटी फॉरेस्ट?
मौजूदा जानकारी के अनुसार IDA ने लगभग 100 एकड़ भूमि चिन्हित कर परियोजना की रूपरेखा तैयार की है। हालांकि संबंधित एजेंसियों ने अभी सार्वजनिक रूप से अंतिम स्थल का विस्तृत नक्शा या आधिकारिक स्थान जारी नहीं किया है। इसलिए स्थान को लेकर अंतिम घोषणा का इंतजार है।
2.5 लाख पौधे लगाने की तैयारी
परियोजना के तहत करीब 2 लाख 50 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता मिलेगी ताकि कम पानी में भी उनका विकास हो सके और पक्षियों तथा अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास तैयार हो।
विशेषज्ञों के अनुसार मियावाकी तकनीक से तैयार वन कुछ वर्षों में घने हरित क्षेत्र का रूप ले सकते हैं। इससे तापमान नियंत्रण, वायु गुणवत्ता और वर्षा जल संरक्षण में भी मदद मिलती है।
अभी किस चरण में है योजना?
फिलहाल परियोजना की योजना और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी बड़े पैमाने पर पौधारोपण शुरू नहीं हुआ है। IDA आवश्यक स्वीकृतियां और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्य प्रारंभ करेगा।
इस समय किसी निश्चित शुरुआत या पूर्णता की आधिकारिक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इस संबंध में अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
शहर को क्या मिलेगा लाभ?
सिटी फॉरेस्ट बनने से इंदौर को बड़ा हरित क्षेत्र मिलेगा। इससे शहरी गर्मी कम करने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने और जैव विविधता को संरक्षण देने में मदद मिलेगी। भविष्य में इसे नागरिकों के लिए प्रकृति आधारित सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है, हालांकि इसका अंतिम स्वरूप परियोजना स्वीकृति के बाद तय होगा।
यह योजना इंदौर में हरित अधोसंरचना बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।