इंदौर वार्ड-60 पार्षद चुनाव मामले में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसारी का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। अदालत ने माना कि नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे में संपत्ति और देनदारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव से जुड़ा है। चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए इफ्तेखार अंसारी ने जिला अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि सुनहरा अंसारी ने चुनावी हलफनामे में अपनी चल-अचल संपत्ति, नगर निगम बकाया और अन्य जरूरी जानकारियां पूरी तरह दर्ज नहीं कीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दस्तावेज, नगर निगम रिकॉर्ड और गवाहों के बयान की जांच की। इसके बाद अदालत ने पाया कि हलफनामे में अधूरी और गलत जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया गया।
भ्रष्ट आचरण के आरोप साबित नहीं हुए
याचिका में चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने और अन्य चुनावी अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसलिए केवल हलफनामे में गलत जानकारी के आधार पर चुनाव रद्द किया गया।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
अदालत ने सुनहरा अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित करते हुए आदेश की प्रति जिला निर्वाचन अधिकारी और इंदौर नगर निगम आयुक्त को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, याचिकाकर्ता की उस मांग को खारिज कर दिया गया जिसमें दूसरे प्रत्याशी को सीधे विजेता घोषित करने की बात कही गई थी।
आगे क्या होगा?
अब निर्वाचन आयोग और नगर निगम आगे की प्रक्रिया तय करेंगे। वार्ड-60 में उपचुनाव कराने या अन्य कानूनी कार्रवाई पर निर्णय संबंधित प्राधिकरण करेगा। यदि सुनहरा अंसारी चाहें तो इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती हैं।
यह फैसला चुनावी हलफनामे में सही और पूरी जानकारी देने की कानूनी जिम्मेदारी को एक बार फिर रेखांकित करता है।