Indore Land Fraud: Elderly Woman Declared Dead on Paper to Grab ₹100 Crore Property, Scam Exposed After 29 Years
इंदौर भूमि घोटाला का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर में करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा करने के लिए एक बुजुर्ग महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर जमीन का नामांतरण भी करा लिया गया। मामला तब उजागर हुआ जब महिला की बेटी ने अपनी मां को जीवित होने के प्रमाण के साथ अधिकारियों के सामने पेश किया।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया है। यह फर्जीवाड़ा करीब 29 साल पुराने दस्तावेजों से जुड़ा बताया जा रहा है।
कैसे हुआ करोड़ों की जमीन का फर्जीवाड़ा?
जानकारी के अनुसार, इंदौर की एक बुजुर्ग महिला के नाम पर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन दर्ज थी। आरोप है कि कुछ रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने मिलकर महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया।
इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में महिला को मृत दर्शाकर जमीन का नामांतरण दूसरे लोगों के नाम पर करवा लिया गया। इस प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
बेटी ने ऐसे खोला राज
मामले की शिकायत महिला की बेटी ने की। उसने अधिकारियों के सामने अपनी मां को जीवित पेश किया और पुराने दस्तावेजों की जांच की मांग की।
जांच में सामने आया कि महिला को वर्षों पहले रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया था। इसके आधार पर संपत्ति से जुड़े राजस्व दस्तावेजों में भी बदलाव किए गए।
पीड़ित परिवार का दावा है कि जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है। इसी वजह से संपत्ति हड़पने के लिए पूरी साजिश रची गई।
29 साल बाद दर्ज हुई एफआईआर
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक और राजस्व स्तर पर जांच कराई जाएगी।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किस स्तर पर जारी हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। राजस्व विभाग के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
क्यों अहम है यह मामला?
विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति विवादों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल नई बात नहीं है, लेकिन किसी जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित कर संपत्ति हस्तांतरण कराना गंभीर अपराध है।
यह मामला राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद और खुलासे हो सकते हैं।
आगे क्या होगा?
पुलिस आरोपियों से पूछताछ करेगी और दस्तावेजों की वैधानिक जांच कराएगी। यदि फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन अब यह भी जांच करेगा कि संपत्ति का नामांतरण किन परिस्थितियों में स्वीकृत किया गया था और क्या सरकारी स्तर पर कोई लापरवाही हुई।