इंदौर में नया स्वच्छता नियम लागू कर दिया गया है। नगर निगम ने ऐसे संस्थानों और प्रतिष्ठानों के लिए नई व्यवस्था शुरू की है, जो प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं। इस कदम का उद्देश्य शहर में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना और लैंडफिल पर दबाव कम करना है।
किस पर लागू होगा नया स्वच्छता नियम?
नगर निगम के अनुसार, होटल, मैरिज गार्डन, हॉस्टल, अस्पताल, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य संस्थान इस नियम के दायरे में आएंगे।
इन संस्थानों को अपने परिसर में ही कचरे का पृथक्करण और निपटान सुनिश्चित करना होगा। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग प्रबंधित करना अनिवार्य रहेगा।
कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ी
नया स्वच्छता नियम लागू होने के बाद बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। नगर निगम अब ऐसे संस्थानों की नियमित निगरानी करेगा।
अधिकारियों का कहना है कि स्रोत स्तर पर कचरा प्रबंधन से शहर की सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इंदौर लगातार स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष शहरों में शामिल रहा है। बढ़ती आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कचरा उत्पादकों की भागीदारी से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली मजबूत होगी।
नियम नहीं मानने पर कार्रवाई
नगर निगम ने संकेत दिए हैं कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
निरीक्षण टीम समय-समय पर जांच करेगी। नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
शहर की स्वच्छता पर क्या असर पड़ेगा?
स्वच्छता विशेषज्ञों के अनुसार, स्रोत पर कचरा प्रबंधन से परिवहन लागत कम होगी और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा।
इससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा भी घट सकती है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इंदौर नगर निगम का लक्ष्य शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। नए नियम के लागू होने के बाद प्रशासन इसके प्रभाव की लगातार समीक्षा करेगा।