Indore to Repair Potholes During Monsoon Using New Technology
इंदौर गड्ढा मरम्मत अभियान को लेकर नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। मानसून के बीच सड़कों पर बढ़ते गड्ढों को देखते हुए निगम ने बारिश के दौरान भी मरम्मत जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए पारंपरिक हॉट मिक्स की जगह नई तकनीक आधारित सामग्री का उपयोग किया जाएगा।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण शहर की कई सड़कों पर गड्ढे उभर आए हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
किसने लिया फैसला?
इंदौर नगर निगम ने मानसून के दौरान सड़क रखरखाव को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि हर साल भारी बारिश के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित होते थे, लेकिन इस बार नई तकनीक से काम रुकने नहीं दिया जाएगा।
नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग को शहर के विभिन्न जोनों में क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर तत्काल पैचवर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैसे होगी गड्ढों की मरम्मत?
निगम अब कोल्ड मिक्स तकनीक का उपयोग करेगा। इस तकनीक की विशेषता यह है कि इसे गीली या नम सतह पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सामान्य तौर पर हॉट मिक्स सामग्री के लिए सूखी सड़क और अनुकूल मौसम की जरूरत होती है। लेकिन कोल्ड मिक्स सामग्री मानसून के दौरान भी प्रभावी रहती है। इससे गड्ढों को अस्थायी नहीं बल्कि अपेक्षाकृत टिकाऊ तरीके से भरा जा सकेगा।
किन क्षेत्रों में शुरू हुआ काम?
नगर निगम ने शहर के प्रमुख मार्गों, व्यस्त चौराहों और अधिक यातायात वाले इलाकों को प्राथमिकता सूची में रखा है। बारिश के बाद सामने आए गड्ढों की लगातार निगरानी की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र में टीम भेजी जाएगी और जल्द से जल्द मरम्मत की जाएगी।
क्यों जरूरी पड़ा यह कदम?
इंदौर में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। कई इलाकों में जलभराव और सड़क क्षति की शिकायतें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान समय पर पैचवर्क नहीं होने से सड़कें तेजी से खराब होती हैं और बाद में बड़े पुनर्निर्माण की आवश्यकता पड़ती है। नई तकनीक से रखरखाव की लागत भी कम हो सकती है।
आगे क्या होगा?
नगर निगम पूरे मानसून सीजन में सड़क निरीक्षण अभियान जारी रखेगा। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जाएंगी।
अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य केवल गड्ढे भरना नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में नागरिकों को सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराना है।