इंदौर में मधुमिलन-छावनी रोड चौड़ीकरण को लेकर रहवासियों और नगर निगम के बीच विवाद बढ़ गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव मंगलवार को अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने 60 फीट प्रस्तावित सड़क चौड़ाई में आने वाले निर्माण तीन दिन में हटाने को कहा।
तीन दिन में निर्माण हटाने के निर्देश
महापौर ने रहवासियों और दुकानदारों से कहा कि वे प्रस्तावित सड़क चौड़ाई में आने वाले हिस्से खुद हटा लें। उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय में निर्माण नहीं हटे, तो निगम कार्रवाई शुरू करेगा।
नगर निगम का कहना है कि मधुमिलन से छावनी तक का मार्ग शहर का अहम कॉरिडोर है। सड़क चौड़ी होने से ट्रैफिक मूवमेंट बेहतर होगा।
रहवासियों ने जताया विरोध
कई रहवासियों ने कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना है कि उनकी संपत्तियां कानूनी रूप से रजिस्टर्ड हैं। इसलिए इन्हें अतिक्रमण नहीं माना जा सकता।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि क्षेत्र के कई मकान 100 साल से ज्यादा पुराने हैं। कुछ परिवारों के पास 1898 तक के संपत्ति दस्तावेज भी हैं।
पुराने दस्तावेज और कोर्ट स्टे का हवाला
पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष और अधिवक्ता बसंत राव ने कहा कि यह क्षेत्र ब्रिटिश काल में विकसित हुआ था। उन्होंने तोड़फोड़ कार्रवाई की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए।
रहवासियों ने 2014 में इसी तरह की कार्रवाई पर कोर्ट स्टे का भी जिक्र किया। उन्होंने मांग की कि पहले इस सड़क को वन-वे रूट के रूप में टेस्ट किया जाए।
आगे क्या होगा
नगर निगम तीन दिन बाद स्थिति की समीक्षा कर सकता है। अगर निर्माण नहीं हटे, तो हटाने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
यह मामला इंदौर में विकास, ट्रैफिक सुधार और पुराने रहवासी अधिकारों के बीच नई बहस बन गया है।