इंदौर में लोकायुक्त छापा कार्रवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के ठिकानों से करोड़ों रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकारी की घोषित आय की तुलना में संपत्ति कई गुना अधिक पाई गई है। इस कार्रवाई ने प्रदेश में सरकारी अधिकारियों की संपत्ति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर और अन्य स्थानों पर कंडवाल से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। जांच टीम ने आवास, कार्यालय और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
प्रारंभिक जांच में बड़ी संख्या में अचल संपत्तियों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड सामने आए हैं।
आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति का दावा
जांच एजेंसियों के अनुसार, अधिकारी की आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर मिला है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके पास उपलब्ध संपत्ति वैध आय से करीब 241 प्रतिशत अधिक पाई गई।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच में लगभग 9.5 करोड़ रुपये की संपत्ति और करीब 2.5 करोड़ रुपये की आय से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।
जमीन, मकान और निवेश की जांच
लोकायुक्त टीम को कई भूखंड, मकान, व्यावसायिक निवेश और अन्य वित्तीय दस्तावेज मिले हैं। इन संपत्तियों के स्वामित्व और खरीद के स्रोत की जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी बैंक खातों, निवेश योजनाओं और अन्य वित्तीय लेनदेन का भी विश्लेषण कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत जांच
यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने का माध्यम होती है।
आगे क्या होगा?
जांच एजेंसियां जब्त दस्तावेजों और संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही हैं। यदि आय और संपत्ति के बीच अंतर की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।