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MGM के 98.5% डॉक्टर तनाव में: 30 घंटे तक ड्यूटी, मानसिक शांति की तलाश और बढ़ती चिंता

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुए अध्ययन में 199 डॉक्टरों में से 98.5% तनावग्रस्त पाए गए। लंबे कार्य घंटे, 24-30 घंटे की ड्यूटी और बढ़ते मानसिक दबाव को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है।

ई-इंदौर डेस्क 01 Jul 2026 20 बार देखा गया Indore
MGM के 98.5% डॉक्टर तनाव में: 30 घंटे तक ड्यूटी, मानसिक शांति की तलाश और बढ़ती चिंता

MGM के 98.5% डॉक्टर तनाव में: 30 घंटे तक ड्यूटी, मानसिक शांति की तलाश और बढ़ती चिंता  |  ई-इंदौर फोटो

98.5% Doctors at MGM Indore Under Stress, Long Duty Hours Raise Mental Health Concerns

MGM डॉक्टर तनाव सर्वे ने इंदौर के चिकित्सा तंत्र से जुड़ी एक गंभीर तस्वीर सामने रखी है। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में किए गए अध्ययन में 98.5 प्रतिशत डॉक्टरों ने किसी न किसी स्तर के तनाव की बात स्वीकार की है। लंबे कार्य घंटे, लगातार ड्यूटी और मानसिक दबाव को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया है।

सर्वे में शामिल कई डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें 24 से 30 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है। इससे शारीरिक थकान के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

किस अध्ययन में सामने आए आंकड़े?

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच एक अध्ययन किया गया। इसमें कुल 199 डॉक्टरों को शामिल किया गया था। अध्ययन के नतीजों के अनुसार 98.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने तनाव, थकान या मानसिक दबाव महसूस करने की बात कही।

कई डॉक्टरों ने माना कि कार्यभार बढ़ने के कारण उन्हें पर्याप्त आराम और निजी समय नहीं मिल पाता। इससे उनके मानसिक संतुलन और जीवनशैली पर असर पड़ रहा है।

24 से 30 घंटे की ड्यूटी बनी चुनौती

सर्वे में शामिल डॉक्टरों ने बताया कि इमरजेंसी, आईसीयू और अन्य विभागों में लगातार काम करना पड़ता है। कई बार ड्यूटी का समय 24 से 30 घंटे तक पहुंच जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बिना पर्याप्त विश्राम के काम करने से तनाव, अनिद्रा, चिंता और पेशेवर थकान बढ़ सकती है। इसे चिकित्सा क्षेत्र में बर्नआउट सिंड्रोम भी कहा जाता है।

मानसिक शांति की तलाश में डॉक्टर

अध्ययन में शामिल कुछ चिकित्सकों ने बताया कि तनाव कम करने के लिए वे योग, ध्यान, संगीत और व्यक्तिगत रुचियों का सहारा ले रहे हैं। कई डॉक्टरों ने बेहतर कार्य-जीवन संतुलन की आवश्यकता भी जताई।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डॉक्टरों के लिए काउंसलिंग, नियमित अवकाश और तनाव प्रबंधन कार्यक्रम समय की जरूरत बन चुके हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?

विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों का मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है। लगातार तनाव से निर्णय लेने की क्षमता और कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी स्वास्थ्यकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद यह विषय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

आगे क्या?

अध्ययन के निष्कर्षों ने चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों के कार्य वातावरण पर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्यूटी के घंटे संतुलित करने और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र विकसित करने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज का यह अध्ययन स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते मानसिक दबाव की ओर ध्यान आकर्षित करता है और डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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