मौसम विभागों ने कई क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन लोगों से दोपहर के समय घरों में रहने और जरूरी सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।
सड़कों और रेल सेवाओं पर असर
फ्रांस में तेज गर्मी के कारण कई सड़कों की सतह नरम पड़ गई। वहीं जर्मनी के लीपज़िग शहर में ट्राम ट्रैक गर्मी से टेढ़े हो गए, जिससे सेवाएं रोकनी पड़ीं।
कई इलाकों में ट्रेनों की गति कम कर दी गई है ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। सार्वजनिक परिवहन पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
लोगों की सेहत पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ता तापमान बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। कई शहरों में कूलिंग सेंटर भी खोले गए हैं।
वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ रही चरम गर्मी जलवायु परिवर्तन का संकेत है। भविष्य में ऐसी हीटवेव अधिक बार और अधिक तीव्र हो सकती हैं।
उन्होंने सरकारों से शहरी ढांचे और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की सलाह दी है।
महत्वपूर्ण बातें
कई देशों में तापमान 40°C से ऊपर पहुंचा।
फ्रांस में सड़कें पिघलने लगीं।
जर्मनी में ट्राम और रेल ट्रैक गर्मी से मुड़ गए।
कई क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया।
हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़े।
कई जगह ट्रेनों की रफ्तार कम की गई।
विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को बड़ी वजह बताया।
लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई।
आगे क्या?
मौसम एजेंसियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में कई यूरोपीय देशों में गर्मी का असर जारी रह सकता है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और राहत उपायों को बढ़ाया जा रहा है।