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प्रेस फ्रीडम पर डच मंत्री की टिप्पणी पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

भारत ने डच मंत्री रॉब जेटन की प्रेस फ्रीडम से जुड़ी टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने कहा कि यह बयान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया माहौल की सही समझ के बिना दिया गया है।

ई-इंदौर डेस्क 18 May 2026 80 बार देखा गया World
प्रेस फ्रीडम पर डच मंत्री की टिप्पणी पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

प्रेस फ्रीडम पर डच मंत्री की टिप्पणी पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया  |  ई-इंदौर फोटो

भारत ने डच मंत्री रॉब जेटन की प्रेस फ्रीडम से जुड़ी टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने कहा कि यह बयान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया माहौल की सही समझ के बिना दिया गया है।

यह मामला तब चर्चा में आया, जब डच नेता ने वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भारत को लेकर टिप्पणी की।

भारत ने टिप्पणी खारिज की

भारतीय अधिकारियों ने बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं का बचाव किया।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत में स्वतंत्र और सक्रिय मीडिया व्यवस्था है। देश में हजारों अखबार, टीवी चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा कि विदेशी नेताओं को भारत के कानूनी और संवैधानिक ढांचे की पूरी जानकारी के बिना टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जोर

सरकार ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है। यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता के लिए संवैधानिक सुरक्षा मौजूद है।

सरकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि अधूरी जानकारी के आधार पर की गई आलोचना देशों के बीच गलतफहमी पैदा करती है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, भारत हाल के वर्षों में आंतरिक मामलों पर विदेशी टिप्पणियों का कड़ा जवाब देता रहा है।

कूटनीतिक चर्चा जारी

इस मुद्दे पर ऑनलाइन और कूटनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। सरकार समर्थकों ने भारत के रुख का समर्थन किया।

वहीं विपक्षी आवाजों ने मीडिया स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर व्यापक बहस की मांग की।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानवाधिकार और शासन जैसे मुद्दों पर ऐसी बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में आम है।

द्विपक्षीय संबंधों पर असर नहीं

विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं। सार्वजनिक असहमति के बावजूद सहयोग जारी रहने की उम्मीद है।

दोनों देशों के अधिकारी नियमित कूटनीतिक चैनलों के जरिए बातचीत जारी रख सकते हैं। भारत ने कहा है कि घरेलू मामलों पर चर्चा में राष्ट्रीय संप्रभुता और संस्थागत प्रक्रियाओं का सम्मान होना चाहिए।

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