Stock Market Crash के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली दर्ज की गई। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी 23,100 के नीचे पहुंच गया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय बाजार पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
Stock Market Crash के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है।
ईरान और इजरायल से जुड़े घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी बाजार की धारणा कमजोर की। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव?
बैंकिंग, आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं।
आगे क्या रहेगा फोकस?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी।
यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।