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इंदौर में हिंदी में होगी B.Tech Civil Engineering की पढ़ाई, जानें क्यों शुरू हुआ कोर्स और क्या फायदे

इंदौर के SGSITS में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से B.Tech Civil Engineering हिंदी माध्यम में शुरू किया गया है। 30 सीटों वाले इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई आसान बनाना है। छात्रों को हिंदी में पढ़ाई और परीक्षा के साथ जरूरी अंग्रेजी कौशल भी सिखाया जाएगा।

ई-इंदौर डेस्क 06 Sep 2026 8 बार देखा गया Education
इंदौर में हिंदी में होगी B.Tech Civil Engineering की पढ़ाई, जानें क्यों शुरू हुआ कोर्स और क्या फायदे

इंदौर में हिंदी में होगी B.Tech Civil Engineering की पढ़ाई, जानें क्यों शुरू हुआ कोर्स और क्या फायदे  |  ई-इंदौर फोटो

indore hindi news में शिक्षा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। इंदौर के श्री गोविंदराम सेक्सेरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से B.Tech Civil Engineering का हिंदी माध्यम पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस विशेष बैच के लिए 30 सीटें रखी गई हैं।

इस पाठ्यक्रम में छात्र हिंदी में पढ़ाई के साथ परीक्षा भी हिंदी में दे सकेंगे। साथ ही, पाठ्यक्रम पूरा करने वाले पात्र छात्रों को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अंतिम वर्ष में ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी दी गई है।

मुख्य घटना

SGSITS ने हिंदी माध्यम से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह नया विकल्प शुरू किया है। संस्थान के अनुसार, अंग्रेजी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते समय कई हिंदी माध्यम के छात्रों को तकनीकी विषय समझने में परेशानी होती है।

इसी समस्या को देखते हुए Civil Engineering की पढ़ाई हिंदी में कराने की शुरुआत की गई है। शुरुआती बैच के लिए 30 सीटें तय हैं और उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 छात्रों का प्रवेश पहले ही हो चुका था।

यह कोर्स क्यों शुरू किया गया?

इस पहल का मुख्य उद्देश्य भाषा को इंजीनियरिंग शिक्षा में बाधा बनने से रोकना है। SGSITS के अनुसार, हिंदी माध्यम से पढ़कर आने वाले कुछ छात्रों को अंग्रेजी में तकनीकी विषय समझने में कठिनाई होती है। कुछ मामलों में यह परेशानी पढ़ाई बीच में छोड़ने तक पहुंच सकती है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा से भी जुड़ी है।

चार साल से चल रही थी तैयारी

यह पाठ्यक्रम अचानक शुरू नहीं किया गया। संस्थान ने इसके लिए करीब चार साल तक तैयारी की।

इस दौरान अंग्रेजी में उपलब्ध तकनीकी अध्ययन सामग्री का हिंदी में अनुवाद किया गया। शिक्षकों को हिंदी में तकनीकी विषय पढ़ाने के लिए कार्यशालाओं के जरिए प्रशिक्षण भी दिया गया।

इसका मतलब है कि छात्रों को केवल सामान्य हिंदी में पढ़ाई नहीं कराई जाएगी, बल्कि Civil Engineering के तकनीकी विषयों को हिंदी में समझाने के लिए अध्ययन सामग्री और शिक्षण व्यवस्था भी तैयार की गई है।

छात्रों को क्या फायदे होंगे?

हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा विषयों को अपनी भाषा में समझना होगा।

छात्र कठिन तकनीकी अवधारणाओं को पहले अपनी भाषा में आसानी से समझ सकेंगे। इसके साथ उन्हें जरूरी अंग्रेजी कौशल भी सिखाया जाएगा, ताकि आगे नौकरी और पेशेवर क्षेत्र में भाषा की वजह से परेशानी न हो।

यानी उद्देश्य छात्रों को अंग्रेजी से अलग करना नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा को हिंदी में आसान बनाते हुए अंग्रेजी की जरूरी क्षमता भी बनाए रखना है।

प्रशासन की कार्रवाई

SGSITS ने इस कार्यक्रम के लिए 30 सीटों का विशेष हिंदी माध्यम बैच तैयार किया है। संस्थान की जानकारी के अनुसार 2026-27 सत्र से यह पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।

SGSITS मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित स्वायत्त संस्थान है। संस्थान की वेबसाइट के अनुसार सामान्य Civil Engineering कार्यक्रम पहले से यहां संचालित है और विभाग की शुरुआत 1956 में हुई थी।

अब आगे क्या होगा

हिंदी माध्यम Civil Engineering का पहला बैच अब अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाएगा। संस्थान का जोर हिंदी में तकनीकी समझ विकसित करने के साथ छात्रों को रोजगार के लिए जरूरी अंग्रेजी कौशल देने पर भी है।

भविष्य में इस मॉडल का विस्तार दूसरे तकनीकी पाठ्यक्रमों तक होता है या नहीं, यह आगे के संस्थागत और सरकारी निर्णयों पर निर्भर करेगा।

जनता पर प्रभाव

इस पहल से खासकर उन विद्यार्थियों को फायदा मिल सकता है जिन्होंने 12वीं तक हिंदी माध्यम से पढ़ाई की है और अंग्रेजी के कारण इंजीनियरिंग करने में झिझक महसूस करते हैं।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई अपनी मजबूत भाषा में समझने का विकल्प मिलने से ऐसे छात्रों के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा तक पहुंच आसान हो सकती है। साथ ही अंग्रेजी कौशल पर ध्यान दिए जाने से उन्हें आगे की पढ़ाई और रोजगार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • हिंदी माध्यम B.Tech Civil Engineering शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू हुआ है।
  • पाठ्यक्रम SGSITS, इंदौर में शुरू किया गया है।
  • हिंदी माध्यम बैच के लिए 30 सीटें हैं।
  • छात्रों को हिंदी में पढ़ाई और परीक्षा देने की सुविधा है।
  • पात्र छात्रों को अंतिम वर्ष में ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी दी गई है।
  • पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले करीब चार साल तक तकनीकी सामग्री के हिंदी अनुवाद और शिक्षक प्रशिक्षण पर काम हुआ।
  • छात्रों को जरूरी अंग्रेजी कौशल भी सिखाया जाएगा।
  • यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भारतीय भाषाओं में शिक्षा की दिशा से जुड़ी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1. SGSITS में हिंदी माध्यम B.Tech Civil Engineering कब शुरू हुआ?

यह पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू किया गया है।

प्रश्न 2. हिंदी माध्यम Civil Engineering में कितनी सीटें हैं?

पहले बैच के लिए 30 सीटें निर्धारित की गई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 छात्रों का प्रवेश हो चुका था।

प्रश्न 3. हिंदी माध्यम में पढ़ने पर क्या अंग्रेजी बिल्कुल नहीं पढ़ाई जाएगी?

नहीं। संस्थान का कहना है कि छात्रों को तकनीकी शिक्षा हिंदी में दी जाएगी, लेकिन करियर के लिए जरूरी अंग्रेजी कौशल भी विकसित कराया जाएगा।

प्रश्न 4. छात्रों को ₹2 लाख की राशि क्यों मिलेगी?

हिंदी माध्यम पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले पात्र छात्रों को अंतिम वर्ष में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन सहायता मिलने की जानकारी दी गई है। इसके लिए लागू नियम और पात्रता शर्तें देखना जरूरी होगा।

समापन

SGSITS का हिंदी माध्यम B.Tech Civil Engineering पाठ्यक्रम उन छात्रों के लिए नया विकल्प है, जिन्हें अंग्रेजी के कारण तकनीकी शिक्षा समझने में परेशानी होती है। 2026-27 से शुरू हुए इस 30 सीटों वाले कार्यक्रम में हिंदी में पढ़ाई और परीक्षा के साथ छात्रों के अंग्रेजी कौशल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 

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