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स्वास्थ्य खर्च बढ़ा, फिर भी इलाज का बोझ परिवारों पर भारी

ई-इंदौर डेस्क 29 May 2026 33 बार देखा गया Health
स्वास्थ्य खर्च बढ़ा, फिर भी इलाज का बोझ परिवारों पर भारी

स्वास्थ्य खर्च बढ़ा, फिर भी इलाज का बोझ परिवारों पर भारी  |  ई-इंदौर फोटो

भारत में सरकारी स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इलाज का आर्थिक बोझ अब भी आम परिवारों पर बना हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य खातों (National Health Accounts) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में सरकार का स्वास्थ्य खर्च लगभग तीन गुना बढ़ा है। इसके बावजूद लोगों को अपनी जेब से चिकित्सा खर्च का बड़ा हिस्सा वहन करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, लेकिन निजी अस्पतालों और दवाओं पर निर्भरता अब भी अधिक है।

सरकारी स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं, अस्पतालों और बीमा कार्यक्रमों पर खर्च में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने कई परिवारों को राहत दी है। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी बढ़ी है।

जेब से खर्च अब भी चिंता का विषय

हालांकि स्वास्थ्य खर्च में सरकारी हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन Out-of-Pocket Expenditure (OOPE) यानी मरीजों द्वारा सीधे किया जाने वाला खर्च अभी भी काफी अधिक है।

दवाइयों, जांच, निजी अस्पतालों और विशेषज्ञ उपचार पर लोगों को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका असर अधिक देखा जाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने से लोगों की निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम हो सकती है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सस्ती दवाओं और बेहतर बीमा कवरेज से परिवारों का आर्थिक बोझ घटाया जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य खातों के आंकड़े

राष्ट्रीय स्वास्थ्य खातों के अनुसार, भारत में कुल स्वास्थ्य खर्च में सरकारी हिस्सेदारी बढ़ी है। वहीं लोगों द्वारा सीधे किए जाने वाले खर्च का अनुपात पहले की तुलना में कम हुआ है, लेकिन यह अब भी कई विकसित देशों की तुलना में अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ने का असर दिख रहा है, लेकिन अभी और सुधार की आवश्यकता है।

आगे क्या होगा

सरकार आने वाले वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। स्वास्थ्य बीमा, डिजिटल हेल्थ और प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं पर फोकस बढ़ सकता है।

यदि सरकारी निवेश और सेवाओं का विस्तार जारी रहता है, तो आने वाले समय में परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ और कम हो सकता है।

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