डेंटल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में इंडियन सोसायटी ऑफ ओरल इम्प्लांटोलॉजिस्ट्स (ISOI) के मिड टर्म कॉन्फ्रेंस और पीजी कन्वेंशन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर के दंत चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक, डिजिटल डेंटिस्ट्री और मेडिकल टूरिज्म के भविष्य पर चर्चा की।
इंदौर को मिलेगा डेंटल टूरिज्म का फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि इंदौर में बेहतर अस्पताल, अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इससे शहर डेंटल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन सकता है। देश और विदेश से मरीज यहां कम लागत में गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए आ सकते हैं।
मेडिकल टेक्नोलॉजी पर रहा खास फोकस
सम्मेलन में डिजिटल इम्प्लांट, 3D प्लानिंग, एआई आधारित डेंटल समाधान और नई उपचार तकनीकों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि नई तकनीक से इलाज अधिक सटीक, सुरक्षित और तेज हो रहा है।
2030 तक बड़ा लक्ष्य
केंद्र सरकार का लक्ष्य भारत को वर्ष 2030 तक मेडिकल टूरिज्म का बड़ा वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और विदेशी मरीजों के लिए सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 16 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में दंत चिकित्सा की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। यदि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञों का बेहतर उपयोग किया जाए तो भारत डेंटल टूरिज्म में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल और डेंटल टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से इंदौर की अर्थव्यवस्था, होटल उद्योग और स्थानीय रोजगार को भी फायदा होगा। साथ ही शहर की पहचान एक उभरते हेल्थकेयर हब के रूप में और मजबूत होगी.