भारत-जापान समझौता 2026 के तहत दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), रक्षा सहयोग और निवेश को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, तकनीकी सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी चर्चा की। दोनों देशों ने भविष्य की तकनीकों में मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
AI और तकनीक पर रहेगा विशेष फोकस
समझौतों के तहत भारत और जापान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों देश रिसर्च, स्टार्टअप और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI सहयोग से दोनों देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता
बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी निर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति पर भी सहमति बनी। इसका उद्देश्य भविष्य की औद्योगिक जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
दोनों देशों ने वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए भी साझेदारी बढ़ाने का फैसला किया।
रक्षा और निवेश पर भी जोर
भारत और जापान ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और संयुक्त रणनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही जापानी निवेश को बढ़ावा देने और भारत में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निवेश और औद्योगिक सहयोग के लिए बहु-अरब डॉलर के रोडमैप पर भी काम किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
दोनों देश अब इन समझौतों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे। संबंधित मंत्रालय और एजेंसियां विभिन्न परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी तथा AI, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।