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सावन सोमवार पर निकली बाबा महाकाल की दूसरी सवारी English Headline

उज्जैन में सावन सोमवार पर बाबा महाकाल की दूसरी सवारी निकली। भस्म आरती, दर्शन और सवारी को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच व्यवस्थाएं जारी रहीं।

ई-इंदौर डेस्क 11 Aug 2026 21 बार देखा गया Madhya Pradesh
सावन सोमवार पर निकली बाबा महाकाल की दूसरी सवारी English Headline

सावन सोमवार पर निकली बाबा महाकाल की दूसरी सवारी English Headline  |  ई-इंदौर फोटो

उज्जैन में सावन सोमवार के अवसर पर बाबा महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। 10 अगस्त 2026 को सावन के दूसरे सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। सावन के दौरान महाकाल मंदिर में भस्म आरती और विशेष दर्शन के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं। 2026 में सावन के सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को हैं।

बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सावन के सोमवारों पर भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस दौरान अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए जाते हैं। इस साल कुल छह सवारियां निर्धारित हैं, जिनमें 7 सितंबर को शाही सवारी शामिल है।

सावन सोमवार पर महाकाल की सवारी

सावन के दूसरे सोमवार यानी 10 अगस्त को बाबा महाकाल की दूसरी सवारी आयोजित की गई। सवारी के दौरान भक्त भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मार्ग पर जुटते हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा बनाए रखने की जिम्मेदारी रहती है।

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसी कारण सोमवार के दिन दर्शन व्यवस्था, कतार प्रबंधन और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।

भस्म आरती का भी विशेष महत्व

महाकाल मंदिर की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में भस्म आरती शामिल है। सावन-भादौ अवधि में इसके समय में भी विशेष व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक सामान्य दिनों की तुलना में सुबह मंदिर के पट पहले खोले जाने हैं और सोमवार को भस्म आरती का समय भी अलग रखा गया है।

भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश और दर्शन की व्यवस्था अलग होती है। इसलिए भक्तों को मंदिर प्रशासन की उस दिन की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार ही पहुंचना चाहिए।

महाकाल की सवारी क्यों निकलती है?

उज्जैन में भगवान महाकाल को नगर का राजा माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार सावन में बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। सवारी के मार्ग पर श्रद्धालु दर्शन करते हैं और धार्मिक जयकारों के साथ भगवान का स्वागत करते हैं।

महाकाल की सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। यह उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। सवारी के दौरान स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

2026 में कितनी सवारियां निकलेंगी?

2026 में बाबा महाकाल की कुल छह सवारियां निर्धारित हैं। इनमें चार सवारियां सावन के सोमवारों पर और दो सवारियां भादौ मास में होंगी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार तारीखें इस प्रकार हैं:

  • पहली सवारी: 3 अगस्त 2026
  • दूसरी सवारी: 10 अगस्त 2026
  • तीसरी सवारी: 17 अगस्त 2026
  • चौथी सवारी: 24 अगस्त 2026
  • पांचवीं सवारी: 31 अगस्त 2026
  • शाही सवारी: 7 सितंबर 2026

इस कार्यक्रम के अनुसार 10 अगस्त की सवारी सावन की दूसरी सवारी रही। इसके बाद 17 और 24 अगस्त को भी सवारी निकलेगी।

आगे 17 अगस्त को बड़ा धार्मिक आयोजन

17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार है। उपलब्ध कैलेंडर के अनुसार इसी दिन नाग पंचमी भी है।

मध्यप्रदेश की रिपोर्टों के अनुसार इस दिन उज्जैन में तीसरी सवारी और नाग पंचमी का आयोजन एक साथ होने की संभावना है। नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में विशेष अवसर पर खुलते हैं। ऐसे में उस दिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन को भीड़ और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।

हालांकि किसी विशेष दिन वास्तविक श्रद्धालु संख्या कितनी रहेगी, इसका आंकड़ा आयोजन के दौरान ही स्पष्ट होगा।

प्रशासन के सामने क्या चुनौती?

सावन सोमवार पर सबसे बड़ी चुनौती बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराना है। इसके लिए मंदिर क्षेत्र के आसपास प्रवेश व्यवस्था, कतार प्रबंधन और यातायात नियंत्रण महत्वपूर्ण होते हैं।

सवारी के मार्ग पर भी भीड़ बढ़ती है। इसलिए श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा निर्धारित रास्तों और बैरिकेडिंग का पालन करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के साथ आने वाले परिवारों को भीड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।

श्रद्धालुओं पर क्या असर?

सावन सोमवार पर उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर सवारी और भस्म आरती के समय मंदिर क्षेत्र में व्यवस्थाएं अधिक नियंत्रित रहती हैं।

बाहर से आने वाले भक्तों के लिए यात्रा से पहले दर्शन व्यवस्था, पार्किंग, प्रवेश मार्ग और उपलब्ध ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। मंदिर प्रशासन की ओर से जारी ताजा निर्देशों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

Important Facts

  • 10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार था।
  • इसी दिन बाबा महाकाल की दूसरी सवारी निर्धारित थी।
  • 2026 में सावन के चार सोमवार हैं।
  • महाकाल की कुल छह सवारियां निर्धारित हैं।
  • 7 सितंबर को शाही सवारी निर्धारित है।
  • 17 अगस्त को सावन सोमवार और नाग पंचमी का संयोग है।
  • भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की प्रमुख दैनिक धार्मिक परंपरा है।

FAQ

Q1. 10 अगस्त 2026 को कौन सा सावन सोमवार था?

10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार था।

Q2. बाबा महाकाल की दूसरी सवारी कब निकली?

बाबा महाकाल की दूसरी सवारी 10 अगस्त 2026 को निर्धारित थी।

Q3. 2026 में महाकाल की कितनी सवारियां हैं?

2026 में बाबा महाकाल की कुल छह सवारियां निर्धारित हैं।

Q4. महाकाल की शाही सवारी कब होगी?

2026 में शाही सवारी 7 सितंबर को निर्धारित है।

Q5. अगली सावन सवारी कब होगी?

सावन की तीसरी सवारी 17 अगस्त और चौथी सवारी 24 अगस्त 2026 को निर्धारित है।

Q6. महाकाल की सवारी क्यों निकाली जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल सावन में अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। 

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