खजराना गणेश मंदिर में दान व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने मंदिर परिसर से पुजारियों के निजी दान पात्र हटाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला मीडिया में मामला सामने आने के बाद लिया गया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में खबर सामने आई थी कि मंदिर परिसर में कुछ पुजारियों की ओर से अलग-अलग दान पात्र रखे गए थे। इससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बन रही थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया।
कलेक्टर ने मंदिर प्रबंधन को निर्देश दिए कि परिसर में केवल अधिकृत दान पेटी ही रहे और निजी दान पात्र हटाए जाएं।
प्रशासन ने क्या कहा?
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि मंदिर में दान की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। श्रद्धालुओं का चढ़ावा निर्धारित व्यवस्था के तहत ही जमा होना चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन कराने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश भी दिए हैं।
श्रद्धालुओं से की गई अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल मंदिर समिति की अधिकृत दान पेटी में ही दान करें। किसी व्यक्ति विशेष या निजी दान पात्र में राशि देने से बचें।
इस कदम का उद्देश्य मंदिर की दान व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।
मंदिर प्रबंधन करेगा कार्रवाई
मंदिर प्रबंधन समिति ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, परिसर का निरीक्षण किया जाएगा और यदि कहीं निजी दान पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाएगा।
आगे क्या होगा?
जिला प्रशासन मंदिर की दान व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखेगा। यदि भविष्य में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
खजराना गणेश मंदिर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। प्रशासन का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।