इंदौर में क्रिप्टो-फॉरेक्स ट्रेडिंग घोटाला सामने आया है। क्राइम ब्रांच ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की ठगी के मामले का खुलासा किया। आरोपियों पर निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर पैसा जुटाने का आरोप है।
कैसे दिया जाता था निवेश का झांसा?
जांच के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का भरोसा दिया जाता था।
शुरुआत में कुछ निवेशकों को छोटी रकम का लाभ दिखाया गया। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा। बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद पैसा वापस नहीं किया गया।
करोड़ों रुपये की ठगी की आशंका
क्राइम ब्रांच को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि कई लोगों से बड़ी रकम जुटाई गई थी। अधिकारियों को करोड़ों रुपये के लेनदेन के संकेत मिले हैं।
पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और क्रिप्टो वॉलेट की जांच कर रही है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
साइबर निवेश घोटालों में बढ़ोतरी
विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में फर्जी निवेश योजनाओं और ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं। साइबर अपराधी ऊंचे रिटर्न का वादा कर लोगों को जाल में फंसाते हैं और बाद में रकम गायब कर देते हैं।
आगे क्या होगा?
क्राइम ब्रांच आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां डिजिटल सबूत जुटा रही हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिना सत्यापन किसी भी क्रिप्टो या फॉरेक्स निवेश योजना में पैसा न लगाएं।
मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।