मध्य प्रदेश के इंदौर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल के साथ मनाया गया. यहां पिछले 50 वर्षों से चली आ रही एक खास परंपरा को जीवंत रखते हुए एक हिंदू परिवार ने शहर काजी को ससम्मान बग्घी में बैठाकर नमाज के लिए ईदगाह पहुंचाया. इस पावन मौके पर शहर काजी ने नमाजियों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की बड़ी मांग भी सामने रखी.
50 साल पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा
इंदौर में गंगा-जमुनी तहजीब का यह खूबसूरत नजारा हर साल देखने को मिलता है. इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके हिंदू परिवार ने इस पुरानी रीत को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ाया. जैसे ही इंदौर के शहर काजी अपने निवास स्थान से बाहर आए, वैसे ही वहां मौजूद हिंदू परिवार के सदस्यों ने फूलों का हार पहनाकर उनका आदर-सत्कार किया और ईद की मुबारकबाद दी. इसके बाद उन्हें विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में बैठाकर मुख्य ईदगाह मैदान तक लाया गया.
गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग
मुख्य ईदगाह में नमाज अदा होने के बाद मंच से देश और समाज की खुशहाली के लिए विशेष दुआ मांगी गई. इसी दौरान शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम समाज पर अक्सर गोवंश को नुकसान पहुंचाने के गलत आरोप लगते हैं. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार तुरंत गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करे. इससे गाय को काटने और उसके अवैध व्यापार पर पूरी तरह से पाबंदी लग सकेगी. उपस्थित हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर इस ऐतिहासिक मांग का पुरजोर समर्थन किया.
पर्यावरण संरक्षण के लिए भी की खास अपील
इस धार्मिक आयोजन के दौरान सिर्फ सामाजिक सौहार्द ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी दिखाई गई. शहर काजी ने मुस्लिम समाज के सभी लोगों से अपील की कि वे पानी की बर्बादी को रोकें. उन्होंने बारिश के पानी को सहेजने और उसे वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए जमीन के अंदर उतारने की बात कही ताकि जल संकट से निपटा जा सके.
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था रही पूरी तरह चाक-चौबंद
इस बड़े त्योहार के अवसर पर इंदौर पुलिस और स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आया. शहर के सभी मुख्य चौराहों, ईदगाह मैदान और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद मौके पर रहकर पूरी व्यवस्था की निगरानी की, जिसके चलते शांतिपूर्ण तरीके से नमाज और उत्सव संपन्न हुआ.