Indore Gas Pipeline Blast Case: High Court Summons ACP, Raises Questions Over Investigation
इंदौर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट केस में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित ACP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हादसे के वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और जांच सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला इंदौर में अवंतिका गैस लिमिटेड की गैस पाइपलाइन को हुए नुकसान और उसके बाद हुए विस्फोट से जुड़ा है। घटना के बाद कई लोग घायल हुए थे और आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गई थी।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। इसी लापरवाही के कारण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई और बाद में विस्फोट हुआ।
हाईकोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि जांच में महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई है। कुछ जिम्मेदार लोगों से पर्याप्त पूछताछ नहीं हुई और उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद कार्रवाई सीमित रही।
इन दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रहे ACP को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया और जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने संकेत दिया कि यदि जांच संतोषजनक नहीं मिली तो आगे भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं। (दैनिक भास्कर)
भाजपा पार्षद का नाम क्यों चर्चा में है?
मामले में भाजपा पार्षद बालमुकुंद सोनी का नाम भी याचिकाकर्ता की ओर से उठाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्माण कार्य और उससे जुड़े निर्णयों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, अब तक किसी अदालत ने भाजपा पार्षद को दोषी नहीं ठहराया है और न ही उनके खिलाफ दोष सिद्ध हुआ है। पुलिस की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस का पक्ष क्या है?
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसी ने अदालत के निर्देशों का पालन करने और सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही है।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान ACP को जांच की प्रगति, दर्ज किए गए बयानों और अब तक हुई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा। इसके बाद अदालत तय करेगी कि जांच मौजूदा एजेंसी से जारी रहेगी या किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता है।
यह मामला फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही होगा।