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इंदौर के रालामंडल में बढ़ी चीतल और हिरणों की आबादी, वन विभाग ने संरक्षण को बताया बड़ी वजह

इंदौर के रालामंडल अभयारण्य में चीतल और हिरणों की आबादी बढ़ी है। वन विभाग इसे बेहतर संरक्षण, हरियाली और सुरक्षित प्राकृतिक आवास का परिणाम मान रहा है।

ई-इंदौर डेस्क 07 Jul 2026 28 बार देखा गया Indore
इंदौर के रालामंडल में बढ़ी चीतल और हिरणों की आबादी, वन विभाग ने संरक्षण को बताया बड़ी वजह

इंदौर के रालामंडल में बढ़ी चीतल और हिरणों की आबादी, वन विभाग ने संरक्षण को बताया बड़ी वजह  |  ई-इंदौर फोटो

Deer and Chital Population Rises in Indore's Ralamandal Sanctuary, Conservation Efforts Show Results

रालामंडल अभयारण्य में वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इंदौर के रालामंडल वन्यजीव अभयारण्य में चीतल और हिरणों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वन विभाग इसे बेहतर संरक्षण, प्राकृतिक आवास और शिकार पर नियंत्रण का परिणाम मान रहा है।

रालामंडल मध्य प्रदेश के सबसे पुराने संरक्षित वन क्षेत्रों में गिना जाता है। शहर के बीचोंबीच स्थित यह अभयारण्य जैव विविधता और इको-टूरिज्म का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

रालामंडल में कैसे बढ़ी वन्यजीवों की संख्या?

वन अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में अभयारण्य में प्राकृतिक वनस्पति को संरक्षित करने, जल स्रोतों को बनाए रखने और मानवीय हस्तक्षेप को सीमित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इसी का असर अब वन्यजीवों की संख्या पर दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से चीतल और हिरणों के झुंड पहले की तुलना में अधिक संख्या में देखे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वन क्षेत्र में शाकाहारी वन्यजीवों की बढ़ती संख्या उस क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है।

इंदौर का प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र

रालामंडल अभयारण्य इंदौर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर खंडवा रोड पर स्थित है। यह करीब 230 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ संरक्षित वन क्षेत्र है।

यहां चीतल, सांभर, नीलगाय, खरगोश, मोर और कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। मानसून के दौरान इसकी हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है।

अभयारण्य में ट्रैकिंग मार्ग, व्यू प्वाइंट और प्रकृति अवलोकन की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधकर्ता और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए?

वन विभाग ने क्षेत्र में नियमित निगरानी, गश्त और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास विकसित करने पर काम किया है। जल संरक्षण संरचनाओं को भी मजबूत किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार वन्यजीवों की गणना समय-समय पर की जाती है, जिससे उनकी आबादी और संरक्षण की स्थिति का आकलन किया जा सके।

वन विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विस्तार के बीच रालामंडल जैसे संरक्षित क्षेत्र जैव विविधता बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आगे क्या होगा?

वन विभाग अब अभयारण्य में पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म गतिविधियों को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। साथ ही वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण पर लगातार काम जारी रहेगा।

चीतल और हिरणों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि रालामंडल का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित स्थिति में है और संरक्षण के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।

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