Mahakal Bhasma Aarti Darshan 22 July 2026: Divine Morning Ritual at Ujjain Temple
महाकाल भस्म आरती के दौरान बुधवार, 22 जुलाई 2026 को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और डमरू की गूंज के बीच विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती हुई। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
ब्रह्म मुहूर्त में हुआ अभिषेक और भस्म आरती
मंदिर की परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का जल, पंचामृत और पवित्र सामग्री से अभिषेक किया गया। इसके बाद चिता भस्म से भस्म आरती की गई। पूरी आरती वैदिक मंत्रों और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई।
आरती के दौरान मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा।
दिव्य श्रृंगार ने श्रद्धालुओं का मन मोहा
भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह से ही कतारों में पहुंचे। नंदी हॉल और निर्धारित दर्शन व्यवस्था के माध्यम से भक्तों ने शांतिपूर्वक दर्शन किए।
महाकाल की भस्म आरती का धार्मिक महत्व
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश की सबसे प्राचीन और विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में गिनी जाती है। यह आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होती है। इसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण कराना होता है।
सावन मास में भस्म आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है, इसलिए इस अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है।
दर्शन व्यवस्था रही सुचारु
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, प्रवेश और दर्शन की समुचित व्यवस्था की। निर्धारित समय पर भक्तों को प्रवेश दिया गया और पूरी आरती परंपरागत रीति से संपन्न हुई।