उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच प्राचीन खड़े हनुमान की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिशें फिलहाल सफल नहीं हो सकी हैं। कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए मंदिर का ढांचा हटाया जा चुका है, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान पर बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों में इसे स्थानांतरित करने के कई प्रयास किए गए।
अब प्रतिमा को भारी मशीनों से हटाने के बजाय विशेषज्ञों की मदद से उसकी संरचना, आधार और आसपास की जमीन की जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि पुरातत्व विशेषज्ञों ने प्रतिमा के मालवा की प्राचीन मूर्तिकला परंपरा से जुड़े होने की संभावना जताई है।
मुख्य घटना
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में कई प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी परियोजना में कंठाल चौराहा से छत्री चौक के बीच स्थित खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा भी प्रभावित हुआ।
प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करने के लिए प्रशासन और नगर निगम की ओर से प्रयास किए गए, लेकिन कई प्रयासों के बाद भी प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका। मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को फिलहाल अस्थायी कैनोपी से सुरक्षित रखा गया है।
पृष्ठभूमि
स्थानीय स्तर पर इस मंदिर का इतिहास करीब 170 साल पुराना बताया जाता है। वहीं विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने प्रतिमा की बनावट और पत्थर को देखते हुए इसके कहीं अधिक पुराने होने की संभावना बताई है। उनके अनुसार प्रतिमा मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले बेसाल्ट पत्थर से बनी प्रतीत होती है।
विशेषज्ञों ने इसे सीधे तौर पर राजा भोज काल की प्रतिमा घोषित नहीं किया है। उनका कहना है कि परमार और राजा भोज के दौर में बेसाल्ट पत्थर पर मूर्तिकला की परंपरा थी, इसलिए प्रतिमा के उस काल से संबंध की संभावना की वैज्ञानिक जांच जरूरी है। प्रतिमा पर लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण उसकी मूल शिल्प विशेषताओं को देखना भी कठिन बताया गया है।
प्रशासन की कार्रवाई
प्रतिमा को हटाने के शुरुआती प्रयासों के बाद अब विशेषज्ञ जांच पर ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार प्रतिमा के निचले हिस्से और उसके आधार की स्थिति समझने के लिए खुदाई भी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी प्राचीन प्रतिमा को स्थानांतरित करने से पहले उसके आधार, वजन, संरचना और जमीन से जुड़ाव की तकनीकी जांच जरूरी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य पुरातत्व विभाग की विशेषज्ञ तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित स्थानांतरण में मददगार हो सकता है।
अब आगे क्या होगा
प्रतिमा की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा को किस तकनीक से और किस स्थान पर सुरक्षित रूप से स्थापित किया जा सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सड़क चौड़ीकरण की जरूरत और धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व वाली प्रतिमा की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की है।
जनता पर प्रभाव
इस घटनाक्रम ने उज्जैन के स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा है। कई लोग प्रतिमा को उसी स्थान पर सुरक्षित रखने या मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं, जबकि सड़क चौड़ीकरण परियोजना भी शहर के आगामी बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियों से जुड़ी है।
इसलिए प्रशासन के अगले फैसले का स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ शहर के विरासत संरक्षण और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
खड़े हनुमान मंदिर का क्षेत्र सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में आया है।
प्रतिमा को स्थानांतरित करने के कई प्रयास सफल नहीं हुए।
मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को अस्थायी रूप से सुरक्षित रखा गया है।
पुरातत्व विशेषज्ञ ने प्रतिमा में मालवा के बेसाल्ट पत्थर के इस्तेमाल की बात कही है।
प्रतिमा के राजा भोज काल से संबंध की संभावना जताई गई है, लेकिन इसकी अभी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रतिमा की वास्तविक उम्र निर्धारित करने के लिए विशेषज्ञ जांच जरूरी बताई गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा क्यों हटाई जा रही है?
कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के कारण प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना है।
प्रश्न 2. क्या प्रतिमा सच में राजा भोज काल की है?
अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इसके राजा भोज काल की मूर्तिकला परंपरा से जुड़े होने की संभावना जताई है और वैज्ञानिक जांच की जरूरत बताई है।
प्रश्न 3. प्रतिमा को अभी क्यों नहीं हटाया गया?
कई प्रयासों के बावजूद प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जा सका। अब भारी मशीनों के बजाय विशेषज्ञ तकनीक से इसकी जांच और सुरक्षित स्थानांतरण पर विचार किया जा रहा है।
प्रश्न 4. क्या मंदिर का पूरा ढांचा अभी मौजूद है?
रिपोर्टों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में मंदिर का मुख्य ढांचा हटाया जा चुका है, जबकि प्रतिमा को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है।
समापन
उज्जैन के खड़े हनुमान की प्रतिमा का मामला अब केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रहा है। इसके संभावित ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए प्रतिमा की वैज्ञानिक जांच और सुरक्षित स्थानांतरण महत्वपूर्ण हो गया है। राजा भोज काल से इसके संबंध की पुष्टि विशेषज्ञ परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।