PoK Issues 48-Hour Ultimatum: JAAC Pressures Pakistan Government Ahead of Elections
PoK 48 घंटे का अल्टीमेटम एक बार फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को सुर्खियों में ले आया है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने इस्लामाबाद सरकार को 48 घंटे का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसकी 38 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का "ग्रैंड एंड फाइनल" चरण शुरू किया जाएगा। यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब क्षेत्रीय विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं।
क्या है पूरा मामला?
JAAC वर्ष 2023 में बना एक नागरिक संगठन है। शुरुआत में इसका आंदोलन महंगाई, बिजली दरों और आटे की कीमत जैसे आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित था। बाद में संगठन ने राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों को भी अपनी मांगों में शामिल कर लिया। 2024 के बड़े आंदोलन के बाद यह संगठन PoK की सबसे प्रभावशाली जनसंस्थाओं में गिना जाने लगा।
अब संगठन का आरोप है कि सरकार ने पहले हुए समझौतों को पूरी तरह लागू नहीं किया। इसी कारण 38 सूत्रीय मांगों के साथ नया आंदोलन शुरू किया गया है।
38 मांगों में सबसे बड़ा विवाद किस बात पर है?
मौजूदा आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
JAAC का कहना है कि इन सीटों के कारण इस्लामाबाद का राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है और स्थानीय जनता का प्रतिनिधित्व कमजोर होता है। दूसरी ओर, PoK की सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इन सीटों को हटाने के लिए केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा।
आर्थिक मांगें भी आंदोलन का बड़ा कारण
संगठन केवल चुनावी सुधार नहीं मांग रहा है। उसकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- स्थानीय लोगों को सस्ती बिजली।
- बिजली परियोजनाओं से अधिक स्थानीय लाभ।
- आटे और जरूरी वस्तुओं पर सब्सिडी।
- महंगाई कम करने के उपाय।
- गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई।
- विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई रोकना।
- नागरिक अधिकारों की सुरक्षा।
गिरफ्तारियों के बाद बढ़ा तनाव
पिछले कुछ दिनों में JAAC के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। संगठन का आरोप है कि सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। वहीं पाकिस्तान प्रशासन ने JAAC के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं।
हाल के प्रदर्शनों के दौरान झड़पों और पुलिस कार्रवाई की भी खबरें सामने आई हैं। कुछ क्षेत्रों में संचार सेवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने के आरोप भी लगाए गए हैं, हालांकि इन दावों पर अलग-अलग पक्षों के अलग-अलग बयान हैं।
अब आगे क्या होगा?
JAAC ने कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रमों में बड़े स्तर पर रैलियां और मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शामिल हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक सभी मांगों पर सार्वजनिक सहमति नहीं दी गई है।
चूंकि जुलाई के अंत में क्षेत्रीय चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए यह आंदोलन आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल को और प्रभावित कर सकता है।