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नेपाल में बाढ़ से तबाही, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ; जानिए कैसे कर रहा पड़ोसी देश की सहायता

नेपाल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच भारत ने राहत सामग्री, दवाइयां और जरूरी सामान भेजे हैं। जानिए भारत नेपाल की किस तरह मदद कर रहा है।

ई-इंदौर डेस्क 28 Aug 2026 12 बार देखा गया World
नेपाल में बाढ़ से तबाही, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ; जानिए कैसे कर रहा पड़ोसी देश की सहायता

नेपाल में बाढ़ से तबाही, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ; जानिए कैसे कर रहा पड़ोसी देश की सहायता  |  ई-इंदौर फोटो

नेपाल में भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद हालात बिगड़ने पर भारत ने राहत और मानवीय सहायता पहुंचाना शुरू कर दिया है। भारत की यह मदद ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत की जा रही है। भारत ने राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां नेपाल भेजी हैं।

भारत इससे पहले भी नेपाल में बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान राहत सामग्री और बुनियादी ढांचे की मदद दे चुका है। अब ताजा बाढ़ संकट में भी दोनों देशों के बीच राहत समन्वय जारी है।

भारत ने नेपाल को क्या-क्या भेजा?

भारत ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। इसमें जरूरत के मुताबिक दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं। ताजा सहायता के तहत भारत ने 10 टन राहत सामग्री भेजी है।

भारत की आपदा राहत सहायता में आम तौर पर टेंट, कंबल, स्वच्छता सामग्री, खाद्य पदार्थ, पानी से जुड़ी जरूरी सामग्री और चिकित्सा सामान शामिल रहे हैं। नेपाल में पिछली बाढ़ के दौरान भी भारत ने ऐसी राहत सामग्री उपलब्ध कराई थी।

बाढ़ के बाद कनेक्टिविटी बहाल करने में भी मदद

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से सड़क संपर्क प्रभावित होने पर भारत ने पहले भी बुनियादी ढांचे की मदद की है। सितंबर 2024 में भारत ने नेपाल को करीब 36 टन राहत सामग्री उपलब्ध कराई थी और सड़क संपर्क बहाल करने के लिए 10 बेली ब्रिज भी दिए थे।

इस तरह भारत की सहायता केवल तत्काल राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही है। आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बहाल करना भी सहयोग का हिस्सा रहा है।

भारत क्यों कर रहा है नेपाल की मदद?

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से करीबी संबंध हैं। भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में पड़ोसी देशों को मानवीय सहायता देना इसकी विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नेपाल में नवंबर 2023 के भूकंप के बाद भी भारत ने राहत सामग्री और दवाइयां भेजी थीं। उस दौरान भारत ने कुल 4.14 टन दवाइयां और 41 टन राहत सामग्री पांच चरणों में उपलब्ध कराई थी।

भारत की मदद से नेपाल को क्या फायदा?

बाढ़ और फ्लैश फ्लड जैसी आपदाओं में सबसे बड़ी जरूरत भोजन, दवाइयों, अस्थायी आश्रय और स्वच्छता से जुड़ी सामग्री की होती है। भारत की राहत सहायता प्रभावित लोगों तक इन जरूरी संसाधनों को पहुंचाने में मदद करती है।

सड़क और पुल जैसी कनेक्टिविटी बहाल होने से राहत टीमों और जरूरी सामान को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना भी आसान हो सकता है।

भारत-नेपाल सहयोग पहले भी रहा है जारी

प्राकृतिक आपदाओं के अलावा भारत नेपाल के विकास कार्यों में भी सहयोग करता रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, सड़क, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सहयोग जारी है।

आपदा के समय यह सहयोग तत्काल राहत और बचाव की जरूरतों पर केंद्रित हो जाता है।

आगे क्या होगा?

नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव प्रयास जारी हैं। भारत की ओर से भी स्थिति के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। ताजा राहत सहायता में 10 टन सामग्री और जरूरी दवाइयां नेपाल पहुंचाई गई हैं।

जनता पर प्रभाव

नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री और दवाइयों की उपलब्धता तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है। वहीं, सड़क और पुलों की बहाली राहत कार्यों तथा प्रभावित क्षेत्रों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने सहायता भेजी।
  • भारत ने ताजा चरण में 10 टन राहत सामग्री भेजी है।
  • राहत में जरूरी दवाइयां भी शामिल हैं।
  • भारत पहले भी नेपाल को बाढ़ और भूस्खलन के दौरान सहायता दे चुका है।
  • 2024 में भारत ने नेपाल को करीब 36 टन राहत सामग्री और 10 बेली ब्रिज दिए थे।
  • भारत की सहायता ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत मानवीय सहयोग का हिस्सा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल 1. भारत नेपाल की बाढ़ में कैसे मदद कर रहा है?

भारत राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां नेपाल भेज रहा है।

सवाल 2. भारत ने नेपाल को कितनी राहत सामग्री भेजी है?

ताजा सहायता के तहत भारत ने 10 टन राहत सामग्री भेजी है।

सवाल 3. क्या भारत पहले भी नेपाल की आपदाओं में मदद कर चुका है?

हां। भारत ने नेपाल में भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई बार राहत और पुनर्निर्माण सहायता दी है।

सवाल 4. बाढ़ के दौरान पुलों की मदद क्यों जरूरी है?

बाढ़ और भूस्खलन से सड़क संपर्क टूट सकता है। पुलों की बहाली से राहत सामग्री और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं।

समापन

नेपाल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच भारत ने राहत और मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। ताजा सहायता में 10 टन राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां शामिल हैं, जबकि भारत पहले भी नेपाल को आपदा के दौरान राहत और कनेक्टिविटी बहाली में सहयोग दे चुका है। 

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